दर्द वही पर पड़ा
छोड़ दिया मेने ……
हाँ हाँ वही पर
जहा कभी कागज ने कलम को छुआ था।
जहा दर्द और इश्क का संगम हुआ था।
जहा से खीची गई थी लकीर।
जहा सो गया था हमारा जमीर।
जहा तडप रहा था एक दिल,
जिसे बड़ी बेरहमी से तोड़ दिया मेने,
दर्दे वही पर ......हाँ वही पर पड़ा
छोड़ दिया मेने……
साथ ले जा कर भी अब में क्या करता ।
वो रोज नए नए और ज्यादा दर्द से गुजरता।
और फिर हो सकता हैं तुम्हे बुरा भला कहता।
खता उसकी भी नही वो कब तक चुप रहता ।
इसलिए उसका रिश्ता अकेलेपन से जोड़ दिया मेने,
दर्द वही पर…… हाँ वही पर
पड़ा छोड़ दिया मेनें……..
अब वहा जाना कभी तो संभल कर जाना।
और हो सके थोडा सा बदल कर जाना।
क्योकि जनता हैं वो दर्द ,तुम्हारा नाम।
फिर चीखने लगा तो कर देगा बदनाम
अब अश्क तो बाकि नहीं होंगे उसमे,
क्योकि उसे पूरी तरह से निचोड़ दिया मेने,
दर्द वही पर .....हां वही पर
पड़ा छोड़ दिया मेने……..
छोड़ दिया मेने ……
हाँ हाँ वही पर
जहा कभी कागज ने कलम को छुआ था।
जहा दर्द और इश्क का संगम हुआ था।
जहा से खीची गई थी लकीर।
जहा सो गया था हमारा जमीर।
जहा तडप रहा था एक दिल,
जिसे बड़ी बेरहमी से तोड़ दिया मेने,
दर्दे वही पर ......हाँ वही पर पड़ा
छोड़ दिया मेने……
साथ ले जा कर भी अब में क्या करता ।
वो रोज नए नए और ज्यादा दर्द से गुजरता।
और फिर हो सकता हैं तुम्हे बुरा भला कहता।
खता उसकी भी नही वो कब तक चुप रहता ।
इसलिए उसका रिश्ता अकेलेपन से जोड़ दिया मेने,
दर्द वही पर…… हाँ वही पर
पड़ा छोड़ दिया मेनें……..
अब वहा जाना कभी तो संभल कर जाना।
और हो सके थोडा सा बदल कर जाना।
क्योकि जनता हैं वो दर्द ,तुम्हारा नाम।
फिर चीखने लगा तो कर देगा बदनाम
अब अश्क तो बाकि नहीं होंगे उसमे,
क्योकि उसे पूरी तरह से निचोड़ दिया मेने,
दर्द वही पर .....हां वही पर
पड़ा छोड़ दिया मेने……..
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