Monday, 14 July 2014

तुम्हे आना होगा

मेरे दिल मेरी धड़कन मेरी पलकों 
सब कुछ सच सच बताना होगा
में जानता मैयत पर नहीं जरुरत तुम्हारी 
पर फिर भी तुम्हे आना होगा

क्योकि अधूरा है अभी कहानी में दर्द 
और लकिरो में अब भी है नाम तुम्हारा
क्योकि टूटे है सपने सिर्फ रात मे
और खुली पलकों में अभी पैगाम तुम्हारा
मिले मुझे मुक्ति बस इस खातिर
तुम्हे अपने अश्को से सजाना होगा
में जानता हु मैयत पर नहीं जरुरत तुम्हारी
पर फिर भी तुम्हे आना होगा

ना उन गरीबो की दुआओ का असर
ना वो मंदिर में बाँधी चुनर काम आई
ना टूटे तारो ने मेरी ख्वाहिसे सुनी
ना एक साथ बीते जो वो शाम आई
अब जो अधुरा सा कुछ रह गया
उसमे बस यादो को समाना होगा
में जानता हु नहीं मैयत पर जरुरत तुम्हारी
पर फिर भी तुम्हे आना होगा

अश्को से करना भले दोस्ती तुम
पर मुस्कराहट से भी न बेर रखना
आ जाये कोई कितना भी करीब
पर दिल से हमेसा उसे गैर रखना
मिलोगी मुझे जब अगले जन्म में
तो हर तरह मुझे ही अपनाना होगा
में जानता हु नहीं मैयत पर जरुरत तुम्हारी
पर फिर भी तुम्हे आना होगा

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