Wednesday, 30 May 2012

my love story ये मेरी प्रेम कहानी हे


बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे

मेरे दिल में तेरा चेहरा तेरे दिल में रहता कोई और हे
मत घबरा तू इतना ये बस मेरे टूटे दिल का शोर हे
मेरा क्या तुझको हस्त देख कर ही हस लूँगा
ना आये तू नजर आँखों इस पट्टी भी कस लूँगा
पर आंखे बंद कर भीं दिखाई तू देती यही परेशानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे

तू बस दो बाते हसकर कर ले दिल खुस हो जाता मेरा
थोड़ी सी खुसी मुझको देने में आखिर क्या जाता हे तेरा
अपने दिल में थोड़ी जगह मेरे लिए भी बनाले
इतने सपनो में कुछ सपने साथ मेरे भी सजले
मत कर गुमान किसी बात का दो पल की जिंदगानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे

केसे तुझको बतलाऊ आखिर कितना तुझसे हे प्यार
तू मांगे अगर जान मेरी तो जान भी दूंगा में  वार
सोते जागते बस तेरा ही मन मेरे हे ख्याल
खुद से खुद अक्सर किया करता हु ये सवाल
के जब इतनी मोहब्बत हे तो क्यों कही ना जुबानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे


वो तुझसे करता नहीं मोहब्बत तुझसे वो खेल रहा हे
और दूसरी तरफ तेरे लिए कोई कितना दुःख झेल रहा हे
प्यार करना हमेसा उससे जो तुझसे प्यार करता हो
तेरे दुःख पर अपनी सारी खुसिया निसार करता हो
में सच्चा दीवाना तेरा पर फिर भी तू उसकी दीवानी हे
बड़ी सोची बड़ी समझी ये मेरी प्रेम कहानी हे
ना हु राजा में इसका और ना ही तू ही रानी हे

one sided love एक तरफ़ा महोब्बत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी , एक तरफ़ा इबादत मेरी

देख के मेरे दिल की हालत आंख खुदा की भर आयी
नजाने कब जुड़ा था रिश्ता जो तू हुई परायी
खोट ना कुछ भी तेरा इसमें खता हे सारी मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
मेरी मोहब्बत में दिल टुटा या ना टुटा मेरा
खुश फिर इस बात के दिल ना दुख हे तेरा
मेरा क्या रो रो कर जिन्दगी कट जाएगी मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
तुझको चाहा खुद की बेकद्री कर दी क्या मेने
कब तक रोकू इन अश्को को अब तो लगे बहने
अश्को में जो आये नजर तो खता ना होगी मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी

एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
कर बेठा तेरा में इतना इंतजार क्यू
इतने चेहरों में आया तेरे ऊपर प्यार क्यू
सोच सोच अब हो गई आंखे नम मेरी
जुबा से कुछ में कह ना सका और राह ताकि क्यों तेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी
एक तरफ़ा महोब्बत मेरी, एक तरफ़ा इबादत मेरी




Monday, 28 May 2012

teri yaadein

     यादें तेरी हसती भी हे
यादें तेरी रुलाती भी हे
चाहा था मेने बुलाना मगर
यादें तेरी याद आती भी हे

यादो का ना तुम भरोसा करो
इन यादो से तुम यु ही डरो
कितना भी चाहे ये रुलाना मगर
किसी की याद में ना आंखे भरो

यादें हर सुख दुःख की साथी तो हे
मरते दम तक साथ निभाती तो हे
भूल जाते उसे तुम दो पल में ही
सारी जिन्दगी उसकी याद दिलाती तो

Friday, 18 May 2012

satyamev jayate सत्यमेव जयते

सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते

जान बुझकर चूमी जिस माँ के लाल ने फासी
करता हु में नमन तुझको भगत सिंह सन्यासी
जिसने आजादी को  बनाया था अपनी दुल्हन
जो निकल पड़ा सर पर बाधे मोत का कफ़न
अच्छे लगते अगर वो कहते
सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते


जिनका ना हे सच से दूर दूर तक वास्ता
जो हस्ते सुनकर हम गरीबो की दस्ता
जिन्होंने पास किये संसद में एसे एसे बिल
जिनकी नहीं कोई तय भ्रस्ट होने की मंजिल
अब तो वो भी ना थकते कहते
 सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते


एक वो थे जो गए सच के चक्कर में मारे
बन्दूक के आगे चला अपनी  लाठी भी ना हारे
फिरंगियों को उड़ा ले गई आयी थी जब वो आंधी
सलाम हे तुझको मेरा मोहनदास करमचंद गाँधी
अच्छे लगते अगर वो कहते
सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते


जो अपने फायदे के लिए हाथ फेलाते हे
चुनाव आने पर झूठे वादे जो कर जाते हे
जिनको नहीं आयी कभी अपनी कुर्सी रास
सदा भुझाते जो दुसरे के कुओ से प्यास
अब तो वो भी ना थकते कहते
सत्यमेव जयते
सत्यमेव सत्यमेव सत्यमेव जयते



Thursday, 17 May 2012

पहचान

जिनके दिलो में जगह नहीं उनसे मकान  पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु

जिन्होंने अपने मतलब के लिए सदा ही घोपे खंजर
जिनके खेत हरे होकर भी धरतिया सदा ही थी बंजर
जो कभी किसी को एक भी दाना दान नहीं करते
जो अपने आगे उस खुदा का भी गुणगान नहीं करते
पागल हु जो उनके दिलो में खुद के लिए सम्मान पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु

जिन्होंने रस्ते के दख्त काट सरो से छीन ली छाया
जिन्होंने सिवा रकाफतो के अब तक कुछ ना कमाया
ले रहे देखो जहा भाई अपने भाई की जान 
जो नहीं समझते हिन्दू मुस्लिम एक समान
पागल हु जो एक हिन्दू  से में अजान पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु

जो कभी उस सहीद दिवस पर आंखे नम नहीं करते
किसी के जले पर जो कभी मरहम नही भरते 
जो नहीं रखते किसी के जीने या मरने से ताल्लुक
जो खुद ही छोड़ के जाना चाहते हे अपना मुल्क
पागल हु जो उनसे उनके मुल्क का नाम हिंदुस्तान पूछता हु
आखिर में किन अंजानो से अपनी पहचान पूछता हु
 

Wednesday, 16 May 2012

AB TO TUM LOT AAO (अब तो तुम लोट आओ)

plz दुआ करो के वो लोट आये

अब तो तुम लोट आओ ,अब तो तुम लोट आओ
अब तो तुम लोट आओ ,अब तो तुम लोट आओ
 
दिन तो मेरे कट जाते पर कट ना पाती राते
तेरे साथ गुजरे लम्हे हर पल हे याद आते
मेने तुझको किये थे अता नजाने कितने गम
तू रोई फुट फुट कर मेरी आंखे भी ना नम
जुदा होकर तुझसे  हर गलती का हुआ अहसास
काफूर (स्वर्ग का झरना) से पानी  पी कर भी बुझा ना पाई  प्यास
अब तो मुझको ना सताओ, अब तो तुम लोट आओ
अब तो तुम लोट आओ ,अब तो तुम लोट आओ

जर्द पड़ गया देख में कितना तक तक तेरी राह
सह कर इतना दर्द भी मेरे लब पर ना थी आह
अश्क देख मेरे जमाना तुझको भला बुरा कहता
अपने बारे में सब सहता तेरे लिए ना सहता
जान गया में तेरी मोहब्बत कर मेरा एतबार
कसम खुदा की  खाता हु करता हु तुझसे प्यार
अब तो मुझको ना सताओ, अब तो तुम लोट आओ
अब तो तुम लोट आओ ,अब तो तुम लोट आओ


छोड़ दू जाना अब अपने यारो की महफ़िल में
सिखु में तेरे सारे  कायदे  बस जाओ तेरे दिल में
अबके मेरी किसी खता पर माफ़ी तू ना देना
गलती हो उल्फत(प्यार) में कोई जान मेरी ले लेना
लोट तो तू खड़ा में तेरे इस्तकबाल (स्वागत)में
अब तो तू ही बसी हे मेरे जहन मेरे ख्याल में 
अब तो मुझको ना सताओ, अब तो तुम लोट आओ
अब तो तुम लोट आओ ,अब तो तुम लोट आओ

KAAVYAALYA(ये मेरा काव्यालय)


 ये मेरा काव्यालय,ये मेरा काव्यालय

यहाँ इकठ्ठे हुए देखो कितने कवी
सबकी  ही कुछ निराली सी हे छवि
गलती एक दुसरे की सुधर रहे हे
अच्छी कविता को सब ही निहार रहे
मिला मुझको देखो एक केसा  विधालय
ये मेरा काव्यालय ,ये मेरा  काव्यालय

यह मुझे बहुत कुछ सिखाता हे
कुछ नया करने को उकसाता हे
कभी कभी कुछ अच्छा में भी लिख जाता हु
बाद उन पक्तियों को सब को सुनाता हु
मेरे जेसे कवियों का अनाथालय
ये मेरा काव्यालय ,ये मेरा  काव्यालय

कितने सारे शब्दों का अटूट हे  रिश्ता
कभी उर्दू कभी हिंदी में हु कलम घिसता
कम से कम आज तो कुछ अच्छा लिख दू
किसी के दिल को भाए कुछ सच्चा लिख दू
हिंदी उर्दू जेसी भाषाओ का देवालय
ये मेरा काव्यालयये, मेरा काव्यालय

kya he tera hal (क्या हे तेरा हाल )

i lov hr
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी  क्या हे तेरा   हाल
मेरी आंखे खुदबखुद नम हो गई और जवाब था तेरा क्या हे ख्याल

तू बता मुझे खुश रहना चहिये या उदास
क्या कभी बुझ पाई हे तेरी बिन पानी के प्यास
मेरी जिन्दगी बिन तेरी एक दम रुखी हे
ये आंखे नजाने कितने दिनों से सुखी हे
मेरे जवाबो में खड़ा कर दिया उसके सामने एक सवाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी  क्या हे तेरा  हाल

जब से मेने उसे उसके सवाल का जवाब हे दिया
लग रहा जेसे उसे  कोई भयानक ख्वाब हे दिया
मेरे कारन क्यों वो इन अनमोल मोतियों को खो रही हे
जब थी नहीं मोहब्बत तो इतना क्यों रो रही हे
हाल पूछने आयी थी और खुद लग रही हे बेहाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी  क्या हे तेरा  हाल

मेरे सिने का वो घाव देख दर्द तोउसे भी हुआ
बस उसकी जुबा से ना निकला के आखिर ये क्या हुआ
मेने अपना दिल निकलकर फेक दिया उसकी याद दिलाता था
रातो को बेसक रुलाया करे दिन में भी रुलाता था
और वेसे भी अब बचा क्या था  मेरे अंदर उसका इस्तमाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी  क्या हे तेरा  हाल

अब में दुसरो की खुसी के लिए ही जिन्दा हु
एक लोहे के पिंजरे में कद वो परिंदा हु
जो बस अपने मालिक का मन बहलाता हे
उन्हें हँसाने के लिए खुद को दर्द पहुचता हे
कुछ ना कर पाया खुद के लिए बस अब यही हे मलाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी  क्या हे तेरा  हाल







Sunday, 13 May 2012


Teri ankh ach pani
Meri dil khani
dasda he  hooooo
Dasda he



Saturday, 12 May 2012

tera berang sa chera तेरा बेरंग सा चेहरा



तेरा बेरंग सा चेहरा
टुटा आँखों का पहरा
छपाए छुपता नहीं जब
दिल में हो दर्द जो गहेरा

तेरा बेरंग सा चेहरा ...

तेरे हे होट भी गुमसुम
हमे क्या कुछ नहीं मालूम
उठा हे किस घर जनाजा 
बंधा हे किस घर सेहरा

तेरा बेरंग सा चेहरा ......

तेरी आँखों का पानी
बया करता हे कहानी
बस खुदा हफिस ना कहना
वरना छा जाये घनघोर अँधेरा

तेरा बेरंग सा चेहरा ......

जो भी हे तुम्हारे दिल
कहो  भरी महफ़िल में
मुख्तसर(छोटा) जीवन मेरा
चाँद लहरों पर ठेहेरा

तेरा बेरंग सा चेहरा ......

जब मेरी आँखों से भी छलका
नमक का पानी वो हल्का
जहा में बाड़ थी आयी
नभ का रंग सुन्हेरा 

तेरा बेरंग सा चेहरा ......


जब से तुम यु हो रूठी
हमारी हर खुसी हे झूठी
नजाने कब थी दिवाली
नजाने कब हे द्श्हेरा

तेरा बेरंग सा चेहरा ......


 अब तुम मन भी जाओ
हमे यु ना तुम  रुलाओ
जब ओगी वापस
 होगा तब ही अब सवेरा

तेरा बेरंग सा चेहरा ......

 






Thursday, 10 May 2012

feelings

1.
कोई किसी को नहीं पालता चंद अनाज के दाने खिलाकर
कोई नहीं बनता हे ताकतवर किसी कमजोर को झुकाकर
धोने वाले धो गए क़त्ल के दाग चंद खरे पानी की बूंदों से
और कोई झूठे इल्जाम भी ना हटा पाया गंगा में नहाकर

2.
लगा क्यों ये हर तरफ  लाशो का मेला हे
ऐ खुदा क्या तुने ही ये घिनोना खेल खेला हे
और तू भी हो गया इस इन्सान की तरह खुदगर्ज
जो रहना चाहता पुरे जहा में अकेला हे 

3.
दुखा नहीं दिल मेरा जब वो मेरे दर्द पर मुस्कुरा रहा था
सबको भेज बुलावा नजाने कोन सी खुसी माना रहा था
और में तो बिन बुलाये उसकी खुसी में सामिल हो गया
पर वो बेरहम मुझे खुसी की कारण भी ना बता रहा था

4.
मुझे उस खुदा की रहमतो पर पूरा यकीन हे
वो जनता हे के आखिर कोन कितना हसीन हे
और क्या करूँगा में आशियानों को लेकर
जब मरने पर नसीब में सिर्फ दो गज जमिन हे



5.
जो टूट गया वो एतबार कहा से लाऊंगा
जो रूठ गया वो प्यार कहा से लाऊंगा
और मेरे पास रोने को भी कोई कन्धा नहीं
अपने जनाजे के लिए कंधे चार कहा से लाऊंगा



6

बहुत सी बाते दबी रह जाती हे इन होटे में 
दर्द का अहेसास हुआ उन्हें बस खुद की चोटों में
और आज मेरे आगे पीछे जो हाथ जोड़े घूम रहा हे
कल तक मेरी गिनती किया करता था मामूली वोटो में 


7

जो कभी खुद ही मेला करते थे समाज को
आज क्यों बुलंद कर रहे हमारी आवाज को
शायद ये भी कोई नया चुनाव चिन्ह ले आये
इसलिय पसंद कर रहे हे हमारे अंदाज को 


8

चंद लफ्जो का दामन थामे एहसासों के पीछे
बस चल दिए हम यु ही अपनी आँखों को मिचे
कुछ वक्त गुजर जाने पर मुड़कर जब हमने देखा
हम बन चुके थे ग़ालिब छोड़ जहा को निचे


9.
जब से लोटा हु उस तयशुदा घहराई हे
 डर लगने लगा खुदा की खुदाई से
किस तरह भरोसा करू ज़माने पर
जब उठ गया हे भरोसा खुद की परछाई से



10

आज इतफाक से मेरे साथ एक इतफाक हो गया

मेरी आँखों का मैलापन खुदबखुद साफ हो गया
शयद मेरे जमीर ने अभी आंखे खोल ली हे
या फिर मेरा अहकार टूटकर खाक हो गया










Friday, 4 May 2012

Wo door rehta he usse uski yaad use tadpati he


वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
कभी कभी वो खुद ही उससे मिलने को आ जाती हे
वो बहुत देर तक निहारता हे उसको
और  कुछ पल में ही उसकी आंखे खुल जाती हे

वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
सपना हे उसका ये उसको जब फोन पर बताती हे
उसके इस पागलपन वो कितना मुस्काती हे
और पूछती हे कब आओगे वापस
ये सुनकर उसकी आंखे नम हो आती हे
वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
कभी कभी वो खुद ही उससे मिलने को आ जाती हे

वो आखरी साँस तक वापस आने का विश्वास दिलाता हे
पर अपनी भारत माता के आगे वो उसको भूल जाता हे
पर शयद वो जनता दो कदमो पर ना आ पायेगा
चार कंधो  पर वापस आ वो अपना वचन निभाता हे
उसकी मोत मोत  नहीं सहादत कहलाती हे
वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
सपना हे उसका ये उसको जब फोन पर बताती हे