Thursday, 10 May 2012

feelings

1.
कोई किसी को नहीं पालता चंद अनाज के दाने खिलाकर
कोई नहीं बनता हे ताकतवर किसी कमजोर को झुकाकर
धोने वाले धो गए क़त्ल के दाग चंद खरे पानी की बूंदों से
और कोई झूठे इल्जाम भी ना हटा पाया गंगा में नहाकर

2.
लगा क्यों ये हर तरफ  लाशो का मेला हे
ऐ खुदा क्या तुने ही ये घिनोना खेल खेला हे
और तू भी हो गया इस इन्सान की तरह खुदगर्ज
जो रहना चाहता पुरे जहा में अकेला हे 

3.
दुखा नहीं दिल मेरा जब वो मेरे दर्द पर मुस्कुरा रहा था
सबको भेज बुलावा नजाने कोन सी खुसी माना रहा था
और में तो बिन बुलाये उसकी खुसी में सामिल हो गया
पर वो बेरहम मुझे खुसी की कारण भी ना बता रहा था

4.
मुझे उस खुदा की रहमतो पर पूरा यकीन हे
वो जनता हे के आखिर कोन कितना हसीन हे
और क्या करूँगा में आशियानों को लेकर
जब मरने पर नसीब में सिर्फ दो गज जमिन हे



5.
जो टूट गया वो एतबार कहा से लाऊंगा
जो रूठ गया वो प्यार कहा से लाऊंगा
और मेरे पास रोने को भी कोई कन्धा नहीं
अपने जनाजे के लिए कंधे चार कहा से लाऊंगा



6

बहुत सी बाते दबी रह जाती हे इन होटे में 
दर्द का अहेसास हुआ उन्हें बस खुद की चोटों में
और आज मेरे आगे पीछे जो हाथ जोड़े घूम रहा हे
कल तक मेरी गिनती किया करता था मामूली वोटो में 


7

जो कभी खुद ही मेला करते थे समाज को
आज क्यों बुलंद कर रहे हमारी आवाज को
शायद ये भी कोई नया चुनाव चिन्ह ले आये
इसलिय पसंद कर रहे हे हमारे अंदाज को 


8

चंद लफ्जो का दामन थामे एहसासों के पीछे
बस चल दिए हम यु ही अपनी आँखों को मिचे
कुछ वक्त गुजर जाने पर मुड़कर जब हमने देखा
हम बन चुके थे ग़ालिब छोड़ जहा को निचे


9.
जब से लोटा हु उस तयशुदा घहराई हे
 डर लगने लगा खुदा की खुदाई से
किस तरह भरोसा करू ज़माने पर
जब उठ गया हे भरोसा खुद की परछाई से



10

आज इतफाक से मेरे साथ एक इतफाक हो गया

मेरी आँखों का मैलापन खुदबखुद साफ हो गया
शयद मेरे जमीर ने अभी आंखे खोल ली हे
या फिर मेरा अहकार टूटकर खाक हो गया










No comments: