2.
लगा क्यों ये हर तरफ लाशो का मेला हे
ऐ खुदा क्या तुने ही ये घिनोना खेल खेला हे
और तू भी हो गया इस इन्सान की तरह खुदगर्ज
जो रहना चाहता पुरे जहा में अकेला हे
3.
दुखा नहीं दिल मेरा जब वो मेरे दर्द पर मुस्कुरा रहा था
सबको भेज बुलावा नजाने कोन सी खुसी माना रहा था
और में तो बिन बुलाये उसकी खुसी में सामिल हो गया
पर वो बेरहम मुझे खुसी की कारण भी ना बता रहा था
सबको भेज बुलावा नजाने कोन सी खुसी माना रहा था
और में तो बिन बुलाये उसकी खुसी में सामिल हो गया
पर वो बेरहम मुझे खुसी की कारण भी ना बता रहा था
4.
मुझे उस खुदा की रहमतो पर पूरा यकीन हे
वो जनता हे के आखिर कोन कितना हसीन हे
और क्या करूँगा में आशियानों को लेकर
जब मरने पर नसीब में सिर्फ दो गज जमिन हे
5.
8
चंद लफ्जो का दामन थामे एहसासों के पीछे
बस चल दिए हम यु ही अपनी आँखों को मिचे
कुछ वक्त गुजर जाने पर मुड़कर जब हमने देखा
हम बन चुके थे ग़ालिब छोड़ जहा को निचे
9.
वो जनता हे के आखिर कोन कितना हसीन हे
और क्या करूँगा में आशियानों को लेकर
जब मरने पर नसीब में सिर्फ दो गज जमिन हे
5.
8
चंद लफ्जो का दामन थामे एहसासों के पीछे
बस चल दिए हम यु ही अपनी आँखों को मिचे
कुछ वक्त गुजर जाने पर मुड़कर जब हमने देखा
हम बन चुके थे ग़ालिब छोड़ जहा को निचे
9.

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