![]() | |
| i lov hr |
मेरी आंखे खुदबखुद नम हो गई और जवाब था तेरा क्या हे ख्याल
तू बता मुझे खुश रहना चहिये या उदास
क्या कभी बुझ पाई हे तेरी बिन पानी के प्यास
मेरी जिन्दगी बिन तेरी एक दम रुखी हे
ये आंखे नजाने कितने दिनों से सुखी हे
मेरे जवाबो में खड़ा कर दिया उसके सामने एक सवाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी क्या हे तेरा हाल
जब से मेने उसे उसके सवाल का जवाब हे दिया
लग रहा जेसे उसे कोई भयानक ख्वाब हे दिया
मेरे कारन क्यों वो इन अनमोल मोतियों को खो रही हे
जब थी नहीं मोहब्बत तो इतना क्यों रो रही हे
हाल पूछने आयी थी और खुद लग रही हे बेहाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी क्या हे तेरा हाल
मेरे सिने का वो घाव देख दर्द तोउसे भी हुआ
बस उसकी जुबा से ना निकला के आखिर ये क्या हुआ
मेने अपना दिल निकलकर फेक दिया उसकी याद दिलाता था
रातो को बेसक रुलाया करे दिन में भी रुलाता था
और वेसे भी अब बचा क्या था मेरे अंदर उसका इस्तमाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी क्या हे तेरा हाल
अब में दुसरो की खुसी के लिए ही जिन्दा हु
एक लोहे के पिंजरे में कद वो परिंदा हु
जो बस अपने मालिक का मन बहलाता हे
उन्हें हँसाने के लिए खुद को दर्द पहुचता हे
कुछ ना कर पाया खुद के लिए बस अब यही हे मलाल
वो मुझसे एक अरसे बाद मिली और पूछ बेठी क्या हे तेरा हाल

No comments:
Post a Comment