Friday, 4 May 2012

Wo door rehta he usse uski yaad use tadpati he


वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
कभी कभी वो खुद ही उससे मिलने को आ जाती हे
वो बहुत देर तक निहारता हे उसको
और  कुछ पल में ही उसकी आंखे खुल जाती हे

वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
सपना हे उसका ये उसको जब फोन पर बताती हे
उसके इस पागलपन वो कितना मुस्काती हे
और पूछती हे कब आओगे वापस
ये सुनकर उसकी आंखे नम हो आती हे
वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
कभी कभी वो खुद ही उससे मिलने को आ जाती हे

वो आखरी साँस तक वापस आने का विश्वास दिलाता हे
पर अपनी भारत माता के आगे वो उसको भूल जाता हे
पर शयद वो जनता दो कदमो पर ना आ पायेगा
चार कंधो  पर वापस आ वो अपना वचन निभाता हे
उसकी मोत मोत  नहीं सहादत कहलाती हे
वो दूर रहता हे उससे उसकी याद उसे तडपती हे
सपना हे उसका ये उसको जब फोन पर बताती हे 


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