Saturday, 10 August 2013

मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये……………….

मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये , बाद एक अरसे के सोया हु में
गए थे मुझे तन्हा जब छोड़कर ,तुमको क्या खबर कितना रोया हु में
मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये ………

बिना अग्नि के लेकर फेरे कभी साथ जीने मरने का था वादा किया
तुमने तोडा वादा कोई गम नहीं पर तुमने उससे भी हे ज्यादा किया
होता पवित्र एक रिश्ता जो तुमे उसकी भी सरे आम निंदा करी
इससे भी ज्यादा अब क्या कहु रूह तक भी हे देखो शर्मिंदा करी

याद करके वो लम्हे जख्मो भरे तुमको क्या खबर कितना रोया हु में
मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये , बाद एक अरसे के सोया हु में
गए थे मुझे तन्हा जब छोड़कर ,तुमको क्या खबर कितना रोया हु में
मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये …………….


बदन पर मेरे जब बोछारे पड़ी मेरे  चित पर तुम्हारी ही मूरत रही
याद आने लगे वो पल हमे जिन पलों में तुम्हारी जरुरत रही
जब आयी थी राते काली घनी नाम तुम्हारा लेकर हम चलते रहे
पेड़ो की टहनिया भी खिलने लगी और मोसम भी देखो बदलते रहे 


बाद पतझड़ हरयाली को देखकर तुमको क्या खबर कितना रोया हु में
मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये , बाद एक अरसे के सोया हु में
गए थे मुझे तन्हा जब छोड़कर ,तुमको क्या खबर कितना रोया हु में
मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये ………………….


तुम जो करते मुझसे मोह्हबत अगर तुम मेरे सिक्वो को पहचानते
ना पेस आते अजनबियों की तरह अगर मेरी नियत को तुम जानते
तुम जुदा मुझसे हो ना सको चाँद तारे निगरानी में लगाये मेने
तेरा चेहरा ओझल ना हो आँखों से नजाने कितने चिराग जलाये मेने


उन चरागों को अपने हाथो से बुझा तुमको क्या खबर कितना रोया हु
मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये , बाद एक अरसे के सोया हु में
गए थे मुझे तन्हा जब छोड़कर ,तुमको क्या खबर कितना रोया हु में
मेरे ख्वाबो को आकार यु ना तोडिये……………….


















Friday, 9 August 2013

Andhero ki chodo ujalo me bi diye jalate he hm
nende hmko bhala kya ayenge nendo ko bi to sulate he hm
ek tu wo shks jisse milne hm the gaye
varna us chand ko bi apni chatt par bulate he hm

har rasta thakh gaye meri rah tak kar
kuki manjil ko bi apne karib bulate he hm

jbse he dekha tujko dard khudko diye he mene sanam
khuli ankho ko bi ab bewajh khwab dikhlate he hm

sukriya tm kro ke moka tmko diya dard dene ka
varna sare jamane ko to ktna rulate he hm

bs tm hami bharo mere ishk ki
phir dekho khud kis kadar tmhare liye bhulate he hm
क्यों हसाकर हे इतना रुलाया तुने
क्यों खुली आँखों से ख्वाब दिखाया तुने
क्यों टुटा ये दिल आज फिर तोड़ दिया
क्यों बिच भवर में अकेला छोड़ दिया
क्यों बनायीं वो दर्द भरी यादें
क्यों किये सारे झूठे वादे
क्यों अश्क आने से पहले पोछ दिए
क्यों घाव मेरे फिर नोच दिए
क्यों बुझते दिए को जलाया तुने
क्यों हसाकर हे इतना रुलाया तुने
क्यों खुली आँखों से ख्वाब दिखाया तुने
जुदा नहीं में तुमसे अगर सांसो में बसा लोगी
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी

शीत लहर या बारिस या ताप्ति हुई दुपहरी हो
वक्त हुआ सहर का या राते घनी अँधेरी हो
पल झपकते ही में अन्ध्यारा बन जाऊंगा
आंशु बनकर तेरी चंचल आँखों में बस जाऊंगा

कब तक और केसी आखिर तुम मुझको बहा लोगी
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी

अम्बर से धरा की देखो कितने मिलो की दुरी हे
तुम कहेती हो अगर हे इश्क तो मिलना बहुत जरुरी हे
तडपती धरा की देखो तुम वो केसे प्यास बुझाता हे
बुँदे बनकर गिरता हे और उसमे ही समां जाता हे

तुम भी अपने अन्दर झांको तो खुद में मुझको पा लोगी
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी

जब भी मेरी याद आए तो मेरे घर पर जाना तुम
मेरी कमरे की सुनी छत और दीवारों से बतयाना तुम
अपना सारा दर्द उन्हें तुम बेखोफ बता देना
एक तस्वीर मेरी वहा उसे साइन से लगा लेना

ऐसा करके तुम मुझको अपने आगोश में छुपा लोगी
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी

pavan rajput
Photo: जुदा नहीं में तुमसे अगर सांसो में बसा लोगी 
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी 

शीत लहर या बारिस या ताप्ति हुई दुपहरी हो
वक्त हुआ सहर का या राते घनी अँधेरी हो
पल झपकते ही में अन्ध्यारा बन जाऊंगा
आंशु बनकर तेरी चंचल आँखों में बस जाऊंगा

कब तक और केसी आखिर तुम मुझको बहा लोगी
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी 

अम्बर से धरा की देखो  कितने मिलो की दुरी हे
तुम कहेती हो अगर हे इश्क तो मिलना बहुत जरुरी हे
तडपती धरा  की  देखो तुम वो केसे प्यास बुझाता हे
बुँदे बनकर गिरता हे और उसमे ही समां जाता हे

तुम भी अपने अन्दर झांको तो खुद में मुझको पा लोगी
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी 

जब भी मेरी याद आए तो मेरे घर पर जाना तुम
मेरी कमरे की सुनी छत और दीवारों से बतयाना तुम
अपना सारा दर्द उन्हें तुम बेखोफ बता देना 
एक तस्वीर मेरी वहा उसे साइन से लगा लेना 

ऐसा करके तुम मुझको अपने आगोश में छुपा लोगी 
जब जब आंखे बंद करोगी अपने पास बुला लोगी

pavan rajput
पहाड़ो के भी सीने से मेने बहता अश्को का समुन्दर देखा हे
बेसक बया ना करो पर दर्द वो तो तुम्हारे दिल के अन्दर देखा हे
और एक तुम ही हो जो अब तक नहीं भीगे उस खारे पानी से
वरना हमने तो मोहब्बत में हरता हुआ सिकंदर देखा हे

जो आसमान नजाने कितनो को तर किया करता था
उसे भी मोहब्बत की तलब में होता हुआ बंजर देखा हे

कब्र में हम ना चैन और ना सुकून से रह सके क्योकि
अपने ही रकीब के हाथो में अपनी मोत का खंजर देखा हे

अब तुमसे ना और कुछ कहना ना सुनना हे मुझे
जब तुम अपने अश्क छुपा रही थी मेने वो मंजर देखा हे


pahado ke bhi sine se mene behta ashko ka samundar dekha he
besak baya na karo tum pr dard wo to tumhare dil ke andar dekha he
or ek tum hi ho jo ab tak nahi bhege us khare pani se
warna humne to mohbbat me harta hua sikandar dekha he
कुछ वक्त बाद तो मेरे दर्द का भी अंदाज बदलने वाला हे
क्योकि वो अश्क बनकर मेरी पलकों से निकलने वाला हे 
वक्त बेवक्त बस में कोशिश करता हु के तुम बदल जाओ 
पर ये कोन जनता हे के आखिर पत्थर कब पिघलने वाला हे 

और संभाल कर रखना दिल वालो अपने अपने दिलो को
सब कुछ भुलाकर मेरा दिल अब फिर मचलने वाला हे

मेरी हस्ती मुस्कुराती जिन्दगी अब किसी के भरोसे नहीं
ये जानकर मुझसे खुदगर्ज जमाना तो क्या खुदा जलने वाला हे
कितनी किताबे मेने काली करी पर दो अक्षरों में उलझ में गया
तुमको क्या हे खबर मेरी सनम छाव में भी देखो झुलस में गया
शब्द केसे भी हो सब पड़े आज तक पर ये लगते हे जेसे हो सबसे अलग
मीरा ने कहे कबीरा ने कहे पर इनको ना समझ पाया ये जग
तूने थामा मेरा हाथ तो खुदबखुद सुब कुछ ही देखो समझ में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................

चाँद को टेहेलते जब देखा भरी रात में सोचा मेरे ही लिए ये आया हे
क्योकि घुरा करा वो मुझे तेरी तरह और मेने भी उसमे तुम्हे पाया हे
ये चाँद तारो की भाषा में कहेने लगा देखो कहा ये फस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................



तुमसे मिलने पर भी बिछड़ने पर भी अश्क भला क्यों मेरे बिखरते रहे
कभी यादो में कभी ख्वाबो में तुम हकीकत बनकर उभरते रहे
ये हल मेरा हुआ जेसे किसी दलदल में जाकर के धस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................

गीत भी में तो कभी पड़ता नहीं आज देखो मेने हे तरनुम लिखी
लफ्ज केसे भी हुए हो बया पर मेने दिल से देखो ये धुन लिखी
शेरो शायरी भी करने लगा गीत गजलो में देखो अब कस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
मेने चाहा तुम्हे खुदा मानकर तुम बस चाहो मुझे एक खता मानकर
तेरे दिल बसेरा मुझे चाहिए क्या करोगी तुम मेरा पता जानकार
मेने चाहा तुम्हे खुदा मानकर तुम बस चाहो मुझे एक खता मानकर

कभी देखा हे मछली को बिना नीर के कुछ वेसे ही तडपता हु तुम्हारे बिना
कभी रखा हे पलकों को कुछ पल जुदा कुछ वेसे ही तड़पता हु तुम्हारे बिना
एक एक लम्हा बिताया मेने तुम्हारे बिना अपनी सजा मानकर
मेने चाहा तुम्हे खुदा मानकर तुम बस चाहो मुझे एक खता मानकर

अगर होता मोह्हबत का निसान ताज तो में वो भी बनता तुम्हारे लिए
रहकर जो तुमसे जुदा लिखता साज तो में वो भी बजाता तुम्हारे लिए
जी रहा हु में होकर के तुमसे जुदा जेसे सांसो को खुदसे जुदा मानकर
मेने चाहा तुम्हे खुदा मानकर तुम बस चाहो मुझे एक खता मानकर

रात भर ख्वाब भी मेरे रोते रहे मेने पलकों में ना अनके उनको दिया
भुला अपना सारा चेन -ओ -सुकून कब था जाने तुमको दिया
सब कुछ हे खोया मेने इश्क में मगर तुमको पाया हे मेने नफा मानकर
मेने चाहा तुम्हे खुदा मानकर तुम बस चाहो मुझे एक खता मानकर

चाँद का जो रिश्ता लहरों से हे मेरा भी हे तुमसे कुछ इसकदर
तुम्हारे ख्वाबो की आहट भी करती तुमको क्या पता कितना बेसबर
तुम्हारे हर एक नाज नखरे नखरे सहता हु तुम्हरी अदा मानकर
मेने चाहा तुम्हे खुदा मानकर तुम बस चाहो मुझे एक खता मानकर

मेरे लफ्जो में तेरा ही जिक्र हुआ बस तुमने ही कभी जाना नहीं
मेरे अश्को पर रोता जमाना रहा तूने उनको भी अपना माना नहीं
जब सुनोगी कभी होगा तुमको एक एक हर्फ़ लिखा तुम्हारी वफ़ा मानकर
मेने चाहा तुम्हे खुदा मानकर तुम बस चाहो मुझे एक खता मानकर



......pavan
तूने दिल तोडा कही का ना छोड़ा
तू ही बता क्या करू
केसे जिउ बिन में तेरे
तू ही बता क्या करू

आंखे भी मेरी नम हो गई हे
सासे भी चलना कम हो गई हे
केसे अब खुद को तुझसे जुदा करू
तू ही बता क्या करू
तूने दिल तोडा कही का ना छोड़ा
तू ही बता क्या करू

जिन्दा रहने की वजह नहीं हे
मरना भी कोई सजा नहीं हे
केसे अब खुद को जख्म अता करू
तू ही बता क्या करू
तूने दिल तोडा कही का ना छोड़ा
तू ही बता क्या करू

तेरा जो दिल थोडा दुखा हे
शयद ये मेरी सच्ची वफ़ा हे
पर अब में केसे किसी से वफ़ा करू
तू ही बता क्या करू
तूने दिल तोडा कही का ना छोड़ा
तू ही बता क्या करू

... पवन
तेरे ख्वाबो में भरने अँधेरा 
देखो आया में बनके लुटेरा 
में लुटेरा... हा में हु लुटेरा......
जब से आया हु में तेरी जिंदगानी में 
पलके रहने लगी तबसे तेरी पानी में
तेरे चेहरे में बस रहती थी मोह्हबत
मेने लिखा हे बस हिज्र तेरी कहानी में

तेरी नफरत में देना तू बसेरा
देखो आया में बनके लुटेरा
में लुटेरा... हा में हु लुटेरा......

चंद लम्हों में तुझको इतना जाना
जेसे नाता हो तुझसे सदियों पुराना
उन सिसकियो को बंद कमरे में भरना
ताकि ताने ना कास पाए ये जमाना
तेरी सांसो पर डाला मेने डेरा
देखो आया में बनके लुटेरा
में लुटेरा... हा में हु लुटेरा......

दो जानो का बना हु में हथियारा
एक दिल तेरा ,एक दिल मेरा बेचारा
में अब जिन्दा बस एक लो की तरह
कोई करो दो अब आंधी को इशारा
ना हो अब मेरे लिए कभी सवेरा
देखो आया में बनके लुटेरा
में लुटेरा... हा में हु लुटेरा.....
एक लम्हे में अगर वो सारे लम्हे भुलाना आसन होता 
तो मेरे अन्दर बस्ता कोई खुदा नहीं एक शेतान होता 
और मुझ जेसा पत्थर क्या चाहता तुम जेसे राही से
कदमो से ठोकर मारता ही सही पर एक कदरदान होता 

कभी उस राह कदम ना रखता जहा तिजारत हो मोह्हबत की
दिल भी टूट जाते हे अगर मुझे इस बात का ज्ञान होता

तूने हाथ थामकर छोड़ दिया कोई शिकायत नहीं
बस उस लम्हे आँखों में नमी होती तो मुझपर एहसान होता

तेरी सदा यही मन्नत थी तुझे मिले एक महल ताज सा
मेरी चाहत थी मिले तेरे साथ चाहे नसीब रेत का मकान होता

में हिफाजत करता तेरी ऐ लो एक दीया बनकर
चाहे तुझसे रोशन करने में मेरा हर करता कुर्बान होता 
अपनी यादो से कहो हद में रहा करे
मेरे ख्वाबो में ना आकर वफ़ा करे 
अपनी यादो से कहो हद में रहा करे

में करूँगा अगर वफ़ा फिर तुमसे 
तुम कहोगी अब दिल लगाना नहीं
मेरी रूह के सहारे जी लोगी मगर
बस मेरी देह को अब आजमाना नहीं
इतना हे गुरुर अगर तुम्हे खुदपर
रोक लेना खुद को मेरा होने से
मेरी आँखों में एक दफा देखना डूबकर
बचा सको बचा लेना खुद को खोने से

जब उनका हे ना कोई वजूद सनम
तो मेरे बारे में भी वो कुछ ना कहा करे
अपनी यादो से कहो हद में रहा करे
मेरे ख्वाबो में ना आकर वफ़ा करे

तेरे जाने से मेरे लफ्जो का हाल बुरा
कहेने क्या लिखने में भी लडखडाता हु
लिखना चाहा जब मोह्हब्बत मेने
लकीर को फिर तुझ तक ले आता हु
अब तू बया कर कोई एसा सफ़र
ना बनाऊ में जिसकी तुझसे मंजिल
राह में ही मिल जाये मुझे इतनी पनाह
ना मागे कुछ और फिर मेरा दिल

मुझको जो कर दिया अता इतने जख्म
कहो कुछ उनका दर्द खुद भी सहा करे
अपनी यादो से कहो हद में रहा करे
मेरे ख्वाबो में ना आकर वफ़ा करे
मेरा यार उंगलियों में उंगलिया डाल चलने से मुकर जाता हे
अकेला ही जाता हे जहा जाता हे क्या इल्म किधर जाता हे 
में उसकी यादो को जलाता हु सर्द हवाओ की खातिर
फिर अपनी ही आँखों से उसपर पानी बिखर जाता हे

अधजली यादो की राख की सेक मुझे सुला देती ह
पर ख्वाब टूट जाते जब ये महताब गुजर जाता हे

जब भी होश मिला खुद को मखाने में पाया मेने
तन्हा रहने पर हर किस्म का नशा उतर जाता हे

तुमने जाते वक्त कहा था मुझसे कुछ बनकर दिखाना
अश्को के दरिया में डूबकर आखिर कोन उभर पता हे

कुछ ज्यादा ही सिद्दत दिखा दी मेने तेरी चाह में
तभी मुझे मेरे जनाजे में हर तरफ तेरा कन्धा नजर आता हे

फिर जन्म लूँगा खुद को तेरे मुताबिक बना लूँगा
सुना हे सजा-ए-मोत पाकर हर गुन्हेगार सुधर जाता हे
दफन हो जाए अक्श मेरा , पर जिन्दा मेरी कहानी रहे 
हर जन्म तेरा दीवाना रहू , और तू बस मेरी दीवानी रहे 

दफन होती कनीज की बस , चाह इतनी हे सलीम
तसवुर करो जब भी दीवार का तेरी आँखों में पानी रहे

कस्तिया को साहिल की जुदाई सहनी ना पड़े अगर
दिन भी द्हेकते रहे ,और राते भी तूफानी रहे

उम्र का मुझपर कहर कोई ना हो मेरे खुदा
घुटने बूढ़े भी जाये पर बनी दिल की जवानी रहे

दो दिलो के मिलन से सदा जमाना यु ही रुसवा रहे
लेला मजनू बदल जाये पर कहानी सदियों पुरानी रहे

ऐ शम्मा तुझे छोड़कर जाएँगे हम क्यों भला
अगर मेरी यादो में यु सदा तेरी यादो की रवानी रहे

दफन हो जाए अक्श मेरा , पर जिन्दा मेरी कहानी रहे
हर जन्म तेरा दीवाना रहू , और तू बस मेरी दीवानी रहे

मोह्हबत

बस एक फरेब हे और कुछ कहा होती हे मोह्हबत
कितनी मासूम पलकों से बेवजह रोती हे मोह्हबत 
और हारा हे जब भी एक दिल , एक दिल को पाने में
दो गज कफ़न में लिपटकर चैन से सोती हे मोह्हबत 

हाथ में हाथ आने पर जो डूब जाते हे काफूर में 
वो भूल जाते हे पलक झपकते ही खोती हे मोह्हबत


काफूर - स्वर्ग का झरना