Friday, 9 August 2013

अपनी यादो से कहो हद में रहा करे
मेरे ख्वाबो में ना आकर वफ़ा करे 
अपनी यादो से कहो हद में रहा करे

में करूँगा अगर वफ़ा फिर तुमसे 
तुम कहोगी अब दिल लगाना नहीं
मेरी रूह के सहारे जी लोगी मगर
बस मेरी देह को अब आजमाना नहीं
इतना हे गुरुर अगर तुम्हे खुदपर
रोक लेना खुद को मेरा होने से
मेरी आँखों में एक दफा देखना डूबकर
बचा सको बचा लेना खुद को खोने से

जब उनका हे ना कोई वजूद सनम
तो मेरे बारे में भी वो कुछ ना कहा करे
अपनी यादो से कहो हद में रहा करे
मेरे ख्वाबो में ना आकर वफ़ा करे

तेरे जाने से मेरे लफ्जो का हाल बुरा
कहेने क्या लिखने में भी लडखडाता हु
लिखना चाहा जब मोह्हब्बत मेने
लकीर को फिर तुझ तक ले आता हु
अब तू बया कर कोई एसा सफ़र
ना बनाऊ में जिसकी तुझसे मंजिल
राह में ही मिल जाये मुझे इतनी पनाह
ना मागे कुछ और फिर मेरा दिल

मुझको जो कर दिया अता इतने जख्म
कहो कुछ उनका दर्द खुद भी सहा करे
अपनी यादो से कहो हद में रहा करे
मेरे ख्वाबो में ना आकर वफ़ा करे

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