Friday, 9 August 2013

कुछ वक्त बाद तो मेरे दर्द का भी अंदाज बदलने वाला हे
क्योकि वो अश्क बनकर मेरी पलकों से निकलने वाला हे 
वक्त बेवक्त बस में कोशिश करता हु के तुम बदल जाओ 
पर ये कोन जनता हे के आखिर पत्थर कब पिघलने वाला हे 

और संभाल कर रखना दिल वालो अपने अपने दिलो को
सब कुछ भुलाकर मेरा दिल अब फिर मचलने वाला हे

मेरी हस्ती मुस्कुराती जिन्दगी अब किसी के भरोसे नहीं
ये जानकर मुझसे खुदगर्ज जमाना तो क्या खुदा जलने वाला हे

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