Friday, 9 August 2013

पहाड़ो के भी सीने से मेने बहता अश्को का समुन्दर देखा हे
बेसक बया ना करो पर दर्द वो तो तुम्हारे दिल के अन्दर देखा हे
और एक तुम ही हो जो अब तक नहीं भीगे उस खारे पानी से
वरना हमने तो मोहब्बत में हरता हुआ सिकंदर देखा हे

जो आसमान नजाने कितनो को तर किया करता था
उसे भी मोहब्बत की तलब में होता हुआ बंजर देखा हे

कब्र में हम ना चैन और ना सुकून से रह सके क्योकि
अपने ही रकीब के हाथो में अपनी मोत का खंजर देखा हे

अब तुमसे ना और कुछ कहना ना सुनना हे मुझे
जब तुम अपने अश्क छुपा रही थी मेने वो मंजर देखा हे


pahado ke bhi sine se mene behta ashko ka samundar dekha he
besak baya na karo tum pr dard wo to tumhare dil ke andar dekha he
or ek tum hi ho jo ab tak nahi bhege us khare pani se
warna humne to mohbbat me harta hua sikandar dekha he

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