Friday, 9 August 2013

क्यों हसाकर हे इतना रुलाया तुने
क्यों खुली आँखों से ख्वाब दिखाया तुने
क्यों टुटा ये दिल आज फिर तोड़ दिया
क्यों बिच भवर में अकेला छोड़ दिया
क्यों बनायीं वो दर्द भरी यादें
क्यों किये सारे झूठे वादे
क्यों अश्क आने से पहले पोछ दिए
क्यों घाव मेरे फिर नोच दिए
क्यों बुझते दिए को जलाया तुने
क्यों हसाकर हे इतना रुलाया तुने
क्यों खुली आँखों से ख्वाब दिखाया तुने

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