कितनी किताबे मेने काली करी पर दो अक्षरों में उलझ में गया
तुमको क्या हे खबर मेरी सनम छाव में भी देखो झुलस में गया
शब्द केसे भी हो सब पड़े आज तक पर ये लगते हे जेसे हो सबसे अलग
मीरा ने कहे कबीरा ने कहे पर इनको ना समझ पाया ये जग
तूने थामा मेरा हाथ तो खुदबखुद सुब कुछ ही देखो समझ में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
चाँद को टेहेलते जब देखा भरी रात में सोचा मेरे ही लिए ये आया हे
क्योकि घुरा करा वो मुझे तेरी तरह और मेने भी उसमे तुम्हे पाया हे
ये चाँद तारो की भाषा में कहेने लगा देखो कहा ये फस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
तुमसे मिलने पर भी बिछड़ने पर भी अश्क भला क्यों मेरे बिखरते रहे
कभी यादो में कभी ख्वाबो में तुम हकीकत बनकर उभरते रहे
ये हल मेरा हुआ जेसे किसी दलदल में जाकर के धस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
गीत भी में तो कभी पड़ता नहीं आज देखो मेने हे तरनुम लिखी
लफ्ज केसे भी हुए हो बया पर मेने दिल से देखो ये धुन लिखी
शेरो शायरी भी करने लगा गीत गजलो में देखो अब कस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
तुमको क्या हे खबर मेरी सनम छाव में भी देखो झुलस में गया
शब्द केसे भी हो सब पड़े आज तक पर ये लगते हे जेसे हो सबसे अलग
मीरा ने कहे कबीरा ने कहे पर इनको ना समझ पाया ये जग
तूने थामा मेरा हाथ तो खुदबखुद सुब कुछ ही देखो समझ में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
चाँद को टेहेलते जब देखा भरी रात में सोचा मेरे ही लिए ये आया हे
क्योकि घुरा करा वो मुझे तेरी तरह और मेने भी उसमे तुम्हे पाया हे
ये चाँद तारो की भाषा में कहेने लगा देखो कहा ये फस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
तुमसे मिलने पर भी बिछड़ने पर भी अश्क भला क्यों मेरे बिखरते रहे
कभी यादो में कभी ख्वाबो में तुम हकीकत बनकर उभरते रहे
ये हल मेरा हुआ जेसे किसी दलदल में जाकर के धस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................
गीत भी में तो कभी पड़ता नहीं आज देखो मेने हे तरनुम लिखी
लफ्ज केसे भी हुए हो बया पर मेने दिल से देखो ये धुन लिखी
शेरो शायरी भी करने लगा गीत गजलो में देखो अब कस में गया
कितनी किताबे मेने काली करी...................

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