बस एक फरेब हे और कुछ कहा होती हे मोह्हबत
कितनी मासूम पलकों से बेवजह रोती हे मोह्हबत
और हारा हे जब भी एक दिल , एक दिल को पाने में
दो गज कफ़न में लिपटकर चैन से सोती हे मोह्हबत
हाथ में हाथ आने पर जो डूब जाते हे काफूर में
वो भूल जाते हे पलक झपकते ही खोती हे मोह्हबत
काफूर - स्वर्ग का झरना
कितनी मासूम पलकों से बेवजह रोती हे मोह्हबत
और हारा हे जब भी एक दिल , एक दिल को पाने में
दो गज कफ़न में लिपटकर चैन से सोती हे मोह्हबत
हाथ में हाथ आने पर जो डूब जाते हे काफूर में
वो भूल जाते हे पलक झपकते ही खोती हे मोह्हबत
काफूर - स्वर्ग का झरना
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