Friday, 9 August 2013

दफन हो जाए अक्श मेरा , पर जिन्दा मेरी कहानी रहे 
हर जन्म तेरा दीवाना रहू , और तू बस मेरी दीवानी रहे 

दफन होती कनीज की बस , चाह इतनी हे सलीम
तसवुर करो जब भी दीवार का तेरी आँखों में पानी रहे

कस्तिया को साहिल की जुदाई सहनी ना पड़े अगर
दिन भी द्हेकते रहे ,और राते भी तूफानी रहे

उम्र का मुझपर कहर कोई ना हो मेरे खुदा
घुटने बूढ़े भी जाये पर बनी दिल की जवानी रहे

दो दिलो के मिलन से सदा जमाना यु ही रुसवा रहे
लेला मजनू बदल जाये पर कहानी सदियों पुरानी रहे

ऐ शम्मा तुझे छोड़कर जाएँगे हम क्यों भला
अगर मेरी यादो में यु सदा तेरी यादो की रवानी रहे

दफन हो जाए अक्श मेरा , पर जिन्दा मेरी कहानी रहे
हर जन्म तेरा दीवाना रहू , और तू बस मेरी दीवानी रहे

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