पागलो के सिवा बेवजह अब मुस्कुराता कोंन हे ?
गेरो के दर्दो में अपनी पलके भीगता कोंन हे ?
गम किसी काँधे सर रख रोने से कम होता हे
पर बिन जान पहचान अब गले से लगता कोंन हे ?
फिसलने की उम्र में , में भी फिसला आखिर क्या करता
अब हाथ की ऊँगली पकड़ चलना सिखाता कोंन हे ?
बचपन में रेत के बहुत आशियाने बनाया करता था में
अब सपनो में भी रेत के घर बनाता कोंन हे ?
शर्म लिहाज तो गहेने थे मेरे देश के
पर अब बड़ो के आगे भी अब शर्माता कोंन हे ?
अपने बुजुर्गो के
आखिर केसे शर्म करेंगे लोग
खुदा के सामने भी
अब नजरे झुकता कोंन हे ?
नशे में धुत रहने
के लिए मेंखाने जाने की झेहमत उठानी पड़ती हे
आखिर अब नजरो से
जाम पिलाता कोंन हे ?
सात जन्मो का तो वादा कर लिया करते हे लोग
पर एक जन्म भी मरते दम तक साथ निभाता कोन हे ?
सबने की बेकद्री
मेरी तुने मुझको समझा
तेरे सिवा इस जहा
में और मुझको चाहता कोंन हे ?
जरुरत नहीं गंगा
स्नान की गली की कीचड़ काफी हे
पर आखिर अब सच्चे
मन से नहाता कोंन हे ?
आशिक तो बहुत सच्चे
हे आज भी लेकिन
आखिर उनकी आशिकी को
अब अजमाता कोंन हे ?
क्यों कह रहे हो
तुम मुझको बेहया
आखिर अब अपनी आबरू
बचाता कोंन हे ?
दुसरो से इतने सवाल
करने की हिम्मत की मेने भी
पर खुद से खुद ये
सवाल पूछ पाता कोंन हे ?





