Thursday, 19 July 2012

LOT AA LOT AA

लोट , लोट , लोट तू अपने देश 
लोट , लोट , लोट तू अपने देश 
ज्यादा दिन अपनों से जुदा ना रख पाए परदेश 
लोट , लोट , लोट तू अपने देश 
तेरे बिन सुना रहता हे ममता का आंचल
एक राह को ही तकती हे  विरह की घायल 
तेरे इंतजार में सुखी अलिंद की हरयाली
नमी नहीं किसी तिनके में और आंखे भी खाली
क्युकी मन से मन हे नाता तो एक आवाज तो आती होगी 
तुझपर ना जचता हे प्यारे ये बेढंगा सा भेष
लोट , लोट , लोट तू अपने देश   
परदेश में कोई माँ जब अपने लाल को सिने लगाती होगी
कितना दिल पर पत्थर रखले याद तुझे भी आती होगी 
कितना बेचैन हुआ जब देखा अपना सा तुने रंग
हस कर कितना रोया जब आया याद वो जीने का ढंग

कही किसी जगह जब सोंधी महक मिटटी की आती होगी
लगता होगा तुझको जेसे आया हे तेरा सन्देश 
लोट , लोट , लोट तू अपने देश   
अपने देश के ठाट छोड़ करता हे उनकी गुलामी
बहुत खून बहाया था क्यों तू ठोक रहा हे सलामी 
रुपया बदलकर डालर में आखिर कब तक मुकुरायेगा
एक ना एक दिन इस मोह माया को खुद ही ठुकराएगा
अकेलेपन की पीर तुझे जब अन्दर ही अन्दर खलती होगी
तब शायद आताहोगा याद अपनों का शोर और कलेश 
लोट , लोट , लोट तू अपने देश 
ज्यादा दिन अपनों से जुदा ना रख पाए परदेश 
लोट , लोट , लोट तू अपने देश 

No comments: