Wednesday, 25 July 2012

तू मुझे देख देख इतना क्यों मुस्कुराती हे



तू मुझे देख देख इतना क्यों मुस्कुराती हे
याद रख मेरी ये आंखे बहुत जज्बाती हे

तू तो बस सोचती हे रुखसत होने के बारे में तुझे क्या पता
ये आंखे इस गम में कितने आंशु बहती हे

अब तो मेरी पलके भी तुझसे परेसान हो गई
क्योकि ये जानती हे तू ही जो मुझे रुलाती हे

दिल से नजर तक सब अश्को की महफ़िल लगा लेते हे
जब जब इस पत्थर जेसे दिल को तेरी याद आती हे

दिल तोड़कर मेरा चेहरा तो तेरा भी उदास हे
हा में जनता हु अपनी गलती पर तू कितना पछताती हे

तेरी  खातिर दर्द में भी मुस्कुराया करता हु में
देख ले ये मोहब्बत आखिर क्या क्या करवाती हे

अपनी जिन्दगी की हर साँस तेरे नाम कर दी मेने
और बता आखिर तू मुझसे और क्या चाहती हे

कभी वक्त मिले मेरे अन्दर झाक कर देखना
तुझसे बिछड़ने की पीर मुझे अन्दर ही अंदर खाती हे

मंदिर  मजीद हर जगह इल्तजा किया करता हु खुदा से
फिर क्यों हर बार तू मिलने से पहले बिछड़ जाती ह

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