अब भरोसा नहीं होता इस ज़माने परखुद की आंखे भी नहीं रोती रुलाने परपहले तो कहती थी अपना हर हल मुझे बतातो आखिर क्यों रूठ गई हाले दिल बताने परचाहे तो तू कितना भी रूठ लेना मुझसेपर मान जानना मेरे एक बार मनाने परऔर यु तो में सिकंदर बनने में भरोसा रखता हुपर नजाने क्यों खुसी मिली दिल हर जाने परखुद को बड़ा पत्थर दिल बता रही थी कल तकक्यों रो रही हे इतना बस जख्म दिखने परहर कोई बस तेरा मेरा चर्चा कर रहा हेछुपता नहीं ये इश्क अक्सर छुपाने परदर्द सहने की छमता तो बहुत रखता हुपर नहीं सह सकता दर्द दिल टूट जाने परयाद रखने को तो कोई ताउम्र याद रख लेमुख़्तसर मुलाकातों भी नहीं भुलाई जाती भुलाने परबहुत गमो से गुजर कर आया था उस रोज मेंपर तेरे लिए मुस्कुरा दिया था तेरे हँसाने पररात तक नशे में खुद को बादशाह समझता थाशर्म तो उसको भी आती होगी होश आने परजरुरत तो पूरी हुई इक फकीर की भीखाली हाथ गया हर कोई ख्वाहिस जताने पर
तलाश इश्क की कर रहा इस जहान में हो गया में गुम कही खुद की पहचान में
Tuesday, 3 July 2012
इस ज़माने पर
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