1.
कभी यादो में आती हो कभी ख्वाबो में आती हो
में तुमको याद रखता हु तुम मुझको भूल जाती हो
नहीं सोया नजाने कितनी रातो से फ़िक्र में तेरी
इस दीवानगी को मेरी तुम पागलपन बताती हो
2.
तुम रूठती रहो में मनाता रहू
रत दिन तुम्हारे गीत गता रहू
नहीं होता इंतजार अब तेरे दीदार का
सपने देखू उनमे ही बुलाता रहू
3.
में जनता हु तेरी आँखों में एक सवाल हे
वो भी ना पूछ पाई तेरी क्या मजाल हे
अगर इतनी ही फ़िक्र हे मेरे हालातो की
उससे ही पूछ ले जिसका मेरी फ़िक्र में बुरा हाल हे
4.
हमारी नम आँखों में तेरा दीदार हो
दिल जिगर जान में तू ही शुमार हो
बस यही चाहत दिल में बसाये बेठा हे
थोडा बहुत तो तुम्हे भी हमसे प्यार हो
5.
मुझे एक बात कभी समझ में बही आती हे
के आखिर क्यों तू मेरे खवाबो में आती हे
मेरे आदत ख़राब कर दी तुने
इसलिए आजकल दिन में भी आंख लग जाती हे'
6.
हर कोई नहीं रोता आंशु दिखने के लिए
नींद नहीं हुआ करती चुराने के लिए
मोहब्बत का उसूल बस खोना ही खोना हे
अश्को के शिवा कुछ नहीं होता पाने के लिए
7.
उसकी याद आती हे थोडा बहुत रो लेता हु
एक तस्वीर हे उसकी गले से लगा सो लेता हु
नहीं रही मेरी आँखों में अब वो नीद की चाहत
प्यार में में कुछ पा ना सका खो तो लेता हु
8.
जाने मेरी किस खता पर तुमने मुझसे मुह मोड़ लिया
खुशियों ने उस पल से मुझसे अपना रिश्ता तोड़ लिया
मेरे घर का रास्ता होकर गुजरता था तेरी गली से
याद ना आये तुम्हे हमारी हमने घर जाना ही छोड़ दिया
9.
मेह्फुस रखा था दिल को ज़माने से छुपाकर
कोई ले गया सरेआम सीने से चुराकर
और क्या सजा दे अब उस बेखोफ चोर को हम
दे गया सजा हमको ही अपने आंशु बहाकर
10.
इतने चहेरो में एक चेहरा उसका याद हे
ऐ खुदा तुझसे ये मेरी दिली फरियाद हे
नाराज ना होना मुझे माफ़ कर देना
मेरे जहन में तू हे पर उसके बाद हे
11.
रंगत को नए रंग में रंग दो चेहरा खिल जायेगा
जिसके लिया उड़ा रंगत का रंग वो फिर मिल जायेगा
और जिन हमसयो (पडोसी) ने हुमदोश्नाह (मिलजुलकर) होकर नोचा था
देख मेरा चेहरे का रंग उनका जहां हिल जायेगा
12.
आखिर क्यों सुना रहा हु उसे अपनी हर दस्ता
जब रहा ही नहीं हे मेरा तुझसे कोई वास्ता
भुलाना चाहा था मेने तो बहुत
पर भुला ना पाया में तेरे घर का रस्ता
13.
अगर मिलेगी तू फिर कभी एक सवाल करूंगा में
याद में तेरी रो रोकर अपनी आंखे लाल करूंगा में
जब तू सोलह श्रंगार कर आयेगी उस चोराहे पर
चार कंधो पर सवार तेरा इस्तकबाल करूँगा में
14.
कुछ भी अर्ज करो तुम पहली वाह मेरी होगी
चोट तुमको जो लगे और वो आह मेरी होगी
चाहत के में दफन हो जाऊ तेरे आंगन में
गुजरो जब तुम वहां से वो राह मेरी होगी
15.
कभी खंजर कभी काटे इन्ही पर तो चला हु में
नहीं कोई नजर एसी के जिसमे ना खला हु में
और अब किस दर करू जाकर अपनी नुमाइश में
अब तो तुने भी माना हे के एक दिलजला हु में
16.
मत कर इतनी मोहब्बत के मेरी आंखे नम हो जाये
क्या पता तेरी एक खता से मेरी सांसे कम हो जाए
खुदा जालिम हे मेरी हर सिददत को छीन लिया
बाद तेरे जाने के जीने की मेरी हसरत ख़तम हो जाये
17.
तेरे पाक हुसन को मेरा सलाम हे
में तो जनता हु मोहब्बत का क्या अंजाम हे
जब मेरे यारो ने पाया मुझे तेरे ख्वाबो की गहराई में डूबा
कहने लगे साले ,अब तो तेरा आशिक ही नाम हे
18.
क्यों लग रहा आज के तू मुझे याद कर रही हे
रो रो कर उस खुदा कुछ फरियाद कर रही हे
नहीं करती मोहब्बत मुझसे यही कहा था तुने
तो क्यों मेरे लिए इन अश्को को बर्बाद कर रही हे
19.
जबसे तुने इसके साथ मोहब्बत का खेल खेला हे
लग गया इसकी जिन्दगी में दाग कोई मेला हे
और तू आई इसकी जिन्दगी में एक मुसाफिर बनकर
तब ये सक्श रहता भरी महफ़िल में भी अकेला हे
20.
यही तो एक उम्र हे फिसलने की
अपने ख्वाबो में खुल के टहलने की
और तुम होते कोन हे हमे रोकने वाले
मुझे बू आ रही हे तुम्हारे जलने की
21.
जिस हुसन को देख देख इतना इतरा रही हो
मेरे जेसे कितने आशिको को रुला रही हो
और हमारे बिना उस खुदा का भी कोई वजूद नहीं
तो तुम कोन हो जो इतना भाव खा रही हो
22.
जिन फरेबी सपनो पर तुम्हे इतना गुरुर हे
उनको एक ना एक दिन टूट के हो जाना चूर हे
और जब आओगी लोटकर वापस मेरी बाहों में
गले लगा कहूँगा के हमे तो ये भी मंजूर हे
23.
गलतिया तो हम भी दो चार कर लेते
तुम्हे अपनी यादो में फिर शुमार कर लेते
अगर होता हमारा दिल हमारे ही पास
हम भी जाकर किसी और से प्यार कर लेते
24.
तेरी एक हा मेरी जिन्दगी सवार देगी
तेरी एक ना मुझे जीतेजी मार देगी
ज़माने से क्यों डरती हो उसका क्या
में तुझे प्यार दूंगा तू मुझे प्यार देगी
25.
तुझे रोता देख में तेरी नक़ल कर रहा हु
अब तेरी हर बात पर अमल कर रहा हु
कभी गुजरे कल में देखता था तुझको मुस्कुराते
इसलिए में आज को फिर कल कर रहा हु
26.
उसको इतना चाहा के खुद की चाह में तो भूल गया
जख्म हुआ इतना गहेरा करना आह में तो भूल गया
याद किया उसको कितना दरिया किनारे बैठकर
चाहता हु अब वापस जाना पर राह तो में भूल
27.
कल तक मेरे साये थे वो मुझसे कतराने लगे हे
मुझे अनदेखा कर अब वो नजरे चुराने लगे हे
तेरी मोहब्बत में नजाने खुद को कितना बदल बेठा हु
जिनसे डरा करता था में अब मुझसे घबराने लगे हे
28.
कर लो अब तो मेरे जनाजे की तयारी
मुझको लग गई मोहब्बत की बीमारी
कब तक छुपाये रखोगे मुज्झ्को चार दिवारी में
बहार दुनिया बन चुकी दुसमन मेरी दुनिया सारी
29
ज़माने में ढूंडा लिया खुदा की तस्वीर नहीं मिलती
हथेली को यु घूरने से उसकी लकीर नहीं बदलती
और 12 साल तो क्या ताउम्र गुलामी कर लेंगे
पर क्या करे अब इस ज़माने में खी हीर नहीं मिलती
30
ऐ खुदा काश अता कर दिए होते मुझे दो दिल
क्योकि एक तो टूट चूका हे भरी महफ़िल
और हम तो मोहब्बत को बेवजह दोष देते रहे
जब हम खुद ही ना हो पाए कभी इसके काबिल
31.
तू नजाने मेरे अन्दर किस कदर हे समाई
दिन में बहुत साये देखे तू रातो की परछाई
सोचा जो इक पल के तेरा नाम लेना छोड़ दू
मेरी सांसो ने मुझसे कर ली उस पल ही बेवफाई
32.
ये तेरे लब की मुस्कराहट को किसने चुराया हे
खुद को हुए जख्म तो तू इतना क्यों घबराया हे
हमारे दर्दो को देख कर तू अनदेखा किया करता था
खुदा ने शयद इसीलिए तुझे दर्द का एहसास कराया हे
33.
तू नहीं यादे बनाने आ गई भुला न पाया अभी पिछली यादे
जनता हु तू तो हमेसा ही किया करती हे मुझसे झूठे वादे
गम में मुस्कराना तुम्हारे लिए आसन होगा
चहरे पर चहरा हम नहीं लगा सकते क्युकी हम हे सीधे साधे
34.
ऐ चाँद आज तेरी चमक में दम वो नहीं
हो भी क्यों न आखिर तेरा गम भी सही
सरे तारे जिस तरफ नजर गडाए बेठे हे
तू भी देख ले मेरा सनम हे वहीँ
35.
श्याद मेरी मोहब्बत कुछ दिनों से हे बीमार
तभी तो उसको हो गया किसी और से प्यार
खोज रहा हु किसी वैद को जो उसका इलाज करे
वरना बेवजह बन जाएगी वो मेरी मोत की जिम्मेदार
36.
आज इतफाक से तुझसे फिर हुई मुलाकात
जयादा नहीं पर सब्र हे कुछ तो हुई बात
हिज्र के गम को दफ़नाने की सोची बहुत
खुदबखुद मेरी आँखों से छलक गए जज्बात
37.
जा बेसक चली जा मेरी जिन्दगी से मेरा दिल तोड़कर
पर मेरे हाथो में जाना मेरी मोत का सामान छोड़कर
ताकि जब तुमसे मुलाकात हो तो कफन ओड़कर
तुम अश्क बहा बहा मर जाओगे हम ना देखेंगे मुह मोड़कर