इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी रातो को था में जागा कभी दिन भी था सोया
कभी गम में हस पड़ा था कभी खुशियों में भी रोया
इस वक्त की नजाकत हमे तब समझ आती
जब बनके रेत हाथो से वक्त फिसल जाये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी रातो को था में जागा कभी दिन भी था सोया
कभी गम में हस पड़ा था कभी खुशियों में भी रोया
इस वक्त की नजाकत हमे तब समझ आती
जब बनके रेत हाथो से वक्त फिसल जाये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
थोड़ी सी जगह दे दो जाना हे मुझे आगे
अपनी सारी जिन्दगी हम सबसे तेज भागे
पीछे मुड़कर देखा हमे तब समझ में
भगदड़ में देखो मंजिल पीछे ही छोड़ आये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
कभी हस जी थी मुझसे अपने दिल की बात तुने
दिल हे तेरा तोडा आंखे लगी हे रोने
याद रखने को इक लम्हा ही था काफी
भुलाने में वो लम्हा जिन्दगी गुजर ही जाये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
इस झा ने तो अब तक मेरा मजाक हे उड़ाया
इक पल की खुसी देकर पल पल ही हे रुलाया
राम नाम सत्य का नारा सुने देता
जीते जी ही मुझको कब्र में दफनाये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
वक्त का ये पलड़ा कभी बराबर नहीं हे होता
एक पलड़ा पता तो एक पलड़ा खोता
केसे केसे महारथियों ने जोर था लगाया
घडी एक कटा कोई हिला न पाए
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
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