Friday, 6 April 2012

Is wakt ne najane इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये



इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी रातो को था में जागा कभी दिन भी था सोया
कभी गम में हस पड़ा था कभी खुशियों में भी रोया
इस वक्त की नजाकत हमे तब समझ आती
जब बनके रेत हाथो से वक्त फिसल जाये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये


थोड़ी सी जगह दे दो जाना हे मुझे आगे
अपनी सारी जिन्दगी हम सबसे तेज भागे
पीछे मुड़कर देखा हमे तब समझ में
भगदड़ में देखो मंजिल पीछे ही छोड़ आये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये

कभी हस जी थी मुझसे अपने दिल की बात तुने
दिल हे तेरा तोडा आंखे लगी हे रोने
याद रखने को इक लम्हा ही था काफी
भुलाने में वो लम्हा जिन्दगी गुजर ही जाये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये

इस झा ने तो अब तक मेरा मजाक हे उड़ाया
इक पल की खुसी देकर पल पल ही हे रुलाया
राम नाम सत्य का नारा सुने देता
जीते जी ही मुझको कब्र में दफनाये
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये

वक्त का ये पलड़ा कभी बराबर नहीं हे होता
एक पलड़ा पता तो एक पलड़ा खोता
केसे केसे महारथियों ने जोर था लगाया
घडी एक कटा कोई हिला न पाए
इस वक्त ने नजाने क्या क्या हे गुल खिलाये
कभी गेर भी अपने अब अपने भी पराये

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