Wednesday, 14 March 2012

hasya kavita hindi









अपने दिल का हाल तुम्हे सुना रहा हु

जब से हुई हे शादी आंशु बहा रहा हु

में खुश था केवल खुद ही हस्ता था

मेरा खाया खाना बिना चूरन ही पचता था

अब दुखी और पुरे ज़माने को हँसा रहा हु

खाना आज  कल बीवी की मर से पचा रहा हु

खाने में वो जहर डालने की धमकी देती हे मुझे

इसलिए आज कल घर का सारा खाना खुद ही पका रहा हु

जब से हुई हे शादी आंशु बहा रहा हु

हर बात पर अपने भाई से डरती हे

कम्बत  खुद ही लड़कर उससे मुझे पिटवाती हे

थाने जाने से भी डरता हु अब तो

दरोगा  को भी तो अपना भाई बताती हे

कल सुबह हुई थी लड़ाई अब तक मार खा रहा हु

जब से हुई शादी आंशु बहा रहा हु

किसी को देख लू इक आंख वो उसे नहीं भाता

घर आकार दरवाजा महू पर हे लग जाता

वो पट्टा बंद मुझे कुत्ता बता रही हे

शयद वो मेरी कुछ इज्जत बड़ा रही हे

क्योकि चुहि की ओकात हे और कहा मर दावा खा रहा हु

जब से हुई शादी आंशु बहा रहा हु

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