अपने दिल
का हाल तुम्हे
सुना रहा हु
जब से
हुई हे शादी
आंशु बहा रहा
हु
में खुश
था केवल खुद
ही हस्ता था
मेरा खाया
खाना बिना चूरन
ही पचता था
अब दुखी
और पुरे ज़माने
को हँसा रहा
हु
खाना आज
कल
बीवी की मर
से पचा रहा
हु
खाने में
वो जहर डालने
की धमकी देती
हे मुझे
इसलिए आज कल
घर का सारा
खाना खुद ही
पका रहा हु
जब से
हुई हे शादी
आंशु बहा रहा
हु
हर बात
पर अपने भाई
से डरती हे
कम्बत खुद
ही लड़कर उससे
मुझे पिटवाती हे
थाने जाने
से भी डरता
हु अब तो
दरोगा को
भी तो अपना
भाई बताती हे
कल सुबह
हुई थी लड़ाई
अब तक मार
खा रहा हु
जब से
हुई शादी आंशु
बहा रहा हु
किसी को
देख लू इक
आंख वो उसे
नहीं भाता
घर आकार
दरवाजा महू पर
हे लग जाता
वो पट्टा
बंद मुझे कुत्ता
बता रही हे
शयद वो
मेरी कुछ इज्जत
बड़ा रही हे
क्योकि चुहि की
ओकात हे और
कहा मर दावा
खा रहा हु
जब से
हुई शादी आंशु
बहा रहा हु

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