Monday, 14 July 2014

अच्छी नही लगती

अब शादियो में सहनाई अच्छी नही लगती 
बेवजह जो चले वो पुरवाई अच्छी नही लगती

और लिखते लिखते जो तुझ् तक ना जा पाये
मुझे वो कलम वो रोशनाई अच्छी नहीं लगती

उस एक नजर का कुसूर हैं सारा का सारा
अम्मा बाबा अब मुझे पढाई अच्छी नही लगती हैं

मेरे दिल के दिल का हशर बहुत दर्दनाक था
मुझे मोहब्बत से मिली जुदाई अच्छी नहीं लगती

एक वक्त मेरा साया तेरी हिफाजत किया करता था
अब तुम नही तो मुझे मेरी परछाई अच्छी नहीं लगती

जब देखता हु तडपते लाचार भूख से मरते इंसान
तो मुझे खुदा तेरी ये खुदाई अच्छी नहीं लगती

अब में बड़ा हो गया हु अब तो फ़िक्र छोड़ दो माँ
मुझे तुम्हारे चेहरे की ये रुसवाई अच्छी नही लगती

जबसे देखा हैं तुझे अश्को के दरिया को पीते
मुझे समुन्द्र तेरी गहराई अच्छी नहीं लगती......

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