हमारी मुलाकातों का कुछ इस कदर सिला देना।
हम नजर आये अगर हाथ हवा में हिला देना।।
जब गहराई हो जाये ,मेरे ख्यालो से गहरी,
तब साहिल से या किसी तिनके से मिला देना।।
और भूक तेरी हो या मेरी ,क्या फर्क पड़ता हैं,
बस जहा मिले तुमको दो निवाले खिला देना।।
मुझे मिलने नहीं देते ,वरना में खुद ही पिला देता,
तुम्हे मिले अगर ये राजनीती ,तो इसे जहर पिला देना।।
हम नजर आये अगर हाथ हवा में हिला देना।।
जब गहराई हो जाये ,मेरे ख्यालो से गहरी,
तब साहिल से या किसी तिनके से मिला देना।।
और भूक तेरी हो या मेरी ,क्या फर्क पड़ता हैं,
बस जहा मिले तुमको दो निवाले खिला देना।।
मुझे मिलने नहीं देते ,वरना में खुद ही पिला देता,
तुम्हे मिले अगर ये राजनीती ,तो इसे जहर पिला देना।।
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