Monday, 14 July 2014

गीने नहीं देती !

आस्तीन अक्सर सांप देती हैं, नगीने नहीं देती !
इन्सान को जज्बात रूह देती है,मशीने नहीं देती !

उसी रोटी का निवाला किसी को जीवन देता है ,
और वही रोटी नजाने कितनो को जीने नहीं देती !

जो खूंखार शेर के भी दांत गिनकर दिखा दे ,
ऐसे बबर शेर और कही की जमीने नहीं देती !

वही रंग, वही खून, तुम बिलकुल मेरे जेसे ही तो हो ,
पर ये राजनीति फिर भी सरहदों को सीने नहीं देती !

ये तुम्हारा कमीनापन तुमने खुद ही कमाया होगा,
वरना एक माँ अपने कुल को कमीने नहीं देती !

मैखाने में जाकर, में आज भी बेठता तो हु,
पर तेरी याद हैं साली कुछ और पिने नहीं देती !

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