आस्तीन अक्सर सांप देती हैं, नगीने नहीं देती !
इन्सान को जज्बात रूह देती है,मशीने नहीं देती !
उसी रोटी का निवाला किसी को जीवन देता है ,
और वही रोटी नजाने कितनो को जीने नहीं देती !
जो खूंखार शेर के भी दांत गिनकर दिखा दे ,
ऐसे बबर शेर और कही की जमीने नहीं देती !
वही रंग, वही खून, तुम बिलकुल मेरे जेसे ही तो हो ,
पर ये राजनीति फिर भी सरहदों को सीने नहीं देती !
ये तुम्हारा कमीनापन तुमने खुद ही कमाया होगा,
वरना एक माँ अपने कुल को कमीने नहीं देती !
मैखाने में जाकर, में आज भी बेठता तो हु,
पर तेरी याद हैं साली कुछ और पिने नहीं देती !
इन्सान को जज्बात रूह देती है,मशीने नहीं देती !
उसी रोटी का निवाला किसी को जीवन देता है ,
और वही रोटी नजाने कितनो को जीने नहीं देती !
जो खूंखार शेर के भी दांत गिनकर दिखा दे ,
ऐसे बबर शेर और कही की जमीने नहीं देती !
वही रंग, वही खून, तुम बिलकुल मेरे जेसे ही तो हो ,
पर ये राजनीति फिर भी सरहदों को सीने नहीं देती !
ये तुम्हारा कमीनापन तुमने खुद ही कमाया होगा,
वरना एक माँ अपने कुल को कमीने नहीं देती !
मैखाने में जाकर, में आज भी बेठता तो हु,
पर तेरी याद हैं साली कुछ और पिने नहीं देती !
No comments:
Post a Comment