ज्यादा नहीं तुमसे अपना हक़ मांगता हैं
जेसे कोई सितारा चाँद से चमक मांगता हैं
तुम्हारे दीदार-ए-हुस्न ने इतना तो सिखाया है
क्यों कोई प्यासा खुदा से फलक मांगता हैं
हर तरफ फेली हैं वबा , इस मोहब्ब्त की
और अमन.. तू बस एक झलक मांगता हैं
फकीरों सा मिजाज हो गया हैं शहर के लोगो का
जिधर देखो वही अब सिक्को की खनक मांगता हैं
जेसे कोई सितारा चाँद से चमक मांगता हैं
तुम्हारे दीदार-ए-हुस्न ने इतना तो सिखाया है
क्यों कोई प्यासा खुदा से फलक मांगता हैं
हर तरफ फेली हैं वबा , इस मोहब्ब्त की
और अमन.. तू बस एक झलक मांगता हैं
फकीरों सा मिजाज हो गया हैं शहर के लोगो का
जिधर देखो वही अब सिक्को की खनक मांगता हैं
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