Monday, 14 July 2014

ज्यादा नहीं

ज्यादा नहीं तुमसे अपना हक़ मांगता हैं
जेसे कोई सितारा चाँद से चमक मांगता हैं 
तुम्हारे दीदार-ए-हुस्न ने इतना तो सिखाया है
क्यों कोई प्यासा खुदा से फलक मांगता हैं

हर तरफ फेली हैं वबा , इस मोहब्ब्त की
और अमन.. तू बस एक झलक मांगता हैं

फकीरों सा मिजाज हो गया हैं शहर के लोगो का
जिधर देखो वही अब सिक्को की खनक मांगता हैं

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