पहले जख्म देती है और फिर मेरे हालात पूछती हैं
वो लड़की शायद् पागल हें जो मुझसे हर बात पूछती हैं
जब तक भवर में थी मुझे ही मुकदर मानती थी कश्ती
जमीन पर क्या उतरी दरिया से उसकी औकात पूछती हैं
मेने भी गुमान में आकर उसको बेवफा कह दिया था
आखिर क्यों अब मेरी रूह मुझसे हर रात पूछती हैं
कोई नहीं देखता वालिद ने अपना सब कुछ दे दिया
दहेज कितना मिला हैं ये अक्सर पूरी बारात पूछती हैं
कुछ फिरते हैं मारे मारे चंद बूंदों की तलाश में
कुछ परिंदे ऐसे भी हैं जिनका पता बरसात पूछती हैं
जिसने कभी कदमो तले रोंद दिये थे जज्बात
वो अक्सर मेंरी कब्र पर आकार मेरे जज्बात पूछती हैं
वो लड़की शायद् पागल हें जो मुझसे हर बात पूछती हैं
जब तक भवर में थी मुझे ही मुकदर मानती थी कश्ती
जमीन पर क्या उतरी दरिया से उसकी औकात पूछती हैं
मेने भी गुमान में आकर उसको बेवफा कह दिया था
आखिर क्यों अब मेरी रूह मुझसे हर रात पूछती हैं
कोई नहीं देखता वालिद ने अपना सब कुछ दे दिया
दहेज कितना मिला हैं ये अक्सर पूरी बारात पूछती हैं
कुछ फिरते हैं मारे मारे चंद बूंदों की तलाश में
कुछ परिंदे ऐसे भी हैं जिनका पता बरसात पूछती हैं
जिसने कभी कदमो तले रोंद दिये थे जज्बात
वो अक्सर मेंरी कब्र पर आकार मेरे जज्बात पूछती हैं
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