Monday, 14 July 2014

पूछती हैं

पहले जख्म देती है और फिर मेरे हालात पूछती हैं
वो लड़की शायद् पागल हें जो मुझसे हर बात पूछती हैं
जब तक भवर में थी मुझे ही मुकदर मानती थी कश्ती
जमीन पर क्या उतरी दरिया से उसकी औकात पूछती हैं

मेने भी गुमान में आकर उसको बेवफा कह दिया था
आखिर क्यों अब मेरी रूह मुझसे हर रात पूछती हैं

कोई नहीं देखता वालिद ने अपना सब कुछ दे दिया
दहेज कितना मिला हैं ये अक्सर पूरी बारात पूछती हैं

कुछ फिरते हैं मारे मारे चंद बूंदों की तलाश में
कुछ परिंदे ऐसे भी हैं जिनका पता बरसात पूछती हैं

जिसने कभी कदमो तले रोंद दिये थे जज्बात
वो अक्सर मेंरी कब्र पर आकार मेरे जज्बात पूछती हैं

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