Monday, 14 July 2014

बचपन अच्छा था

इन टूटे दिलो से तो वो टूटे खिलोने अच्छे थे
इन बड़े बड़े महलो से वो छोटे छोटे कोने अच्छे थे
इन फरेबी मुस्कराहट से तो वो खिलखिलाना अच्छा था
अश्क छुपाने से वो चोट छुपाना अच्छा था
जिन्दगी की मार से वो बड़ो का मरना अच्छा था
आज की जीत से वो तब का हारना भी अच्छा था
इन जिम्मेदारियों के बोझ से तो वो बसते का वजन अच्छा थे
कुछ भी कहो यारोइस जवानी से वो बचपन अच्छा था


खुद कमाये हजारो से वो जिद्द का रूपया एक अच्छा था
जन्मदिन पर बड़ी बड़ी दावतो से वो दो रूपये का केक अच्छा था
नजरे चुराने से वो दुसरो का टिफिन चुराना अच्छा था
इस सन्नाटे से वो लाई ट जाने पर जो मचाया वो शोर मचानाअच्छा था

इतने व्यस्त रहने से वो वक्त की बर्बादी भी अच्छी थी
आज की खुली छूट से बंधन वाली आजादी अच्छी थी
इन मतलब के यारो से वो सच्चा दुश्मन भी अच्छा थे
कुछ भी कहो यारो इस जवानी से वो बचपन अच्छा था

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