कभी कभी मेरा साया मुझे खत में लिखकर भेजता है
की मेरा अपना ही मेरे जले पर अब रोटिया सेकता है
और मेने मसखरा लिबास पहना था दर्द छुपाने के लिये
अब हर कोइ मेरे दर्द को मसखरे अंदाज में देखता है
वो भी हस्ते है -2 और वो भी हस लेते है मेरे करतबो पर
बस में नहीं हस्ता यही एक गम मुझे बार बार कुरेदता है
की मेरा अपना ही मेरे जले पर अब रोटिया सेकता है
और मेने मसखरा लिबास पहना था दर्द छुपाने के लिये
अब हर कोइ मेरे दर्द को मसखरे अंदाज में देखता है
वो भी हस्ते है -2 और वो भी हस लेते है मेरे करतबो पर
बस में नहीं हस्ता यही एक गम मुझे बार बार कुरेदता है
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