जब घनघोर अँधेरा हो छाया
जब तडपे चंचल सी काया
जब राहे सब अनजानी हो
जब आँखों में बस पानी हो
जब साथ नो ये चाँद सितारे
जब मन अपना सब कुछ हारे
तब अपनी आँखों को मुन्दो
और अन्ध्यारे में भी प्रकाश चुनो
बस अपने मन की आवाज सुनो
जब का सुखे काजल
जब साथ न हो माँ का आंचल
जब सब हो जाये उथल पुथल
जब सांसो में न हो हल चल
जब सूनापन खाए जाये
जब दिल भी थोडा घबराये
तब बिन कुछ भी सोचे समझे
खुद का तुम विश्वास बनो
बस अपने दिल की आवाज सुनो
जब कुछ न तुम्हे दिखाई दे
कोई आहट भी न सुनाई दे
जब फूल से भी चुबते हो कांटे
जब कोई न सुख दुःख बाटे
जब कोई न थामे हाथ तुम्हारे
जब न हो तिनके का भी सहारा
उस पल खुद को दुनिया समझकर
अपना ही तुम हाथ चुनो
बस अपने मन की आवाज सुनो
जब राम नाम भी साथ न दे
जब कोई अपना हाथ न दे
जब ही घोपे खंजर
जब खुशिया हो जाये बंजर
जब सब कुछ हो जाये ख़त्म
जब परिस्थिया भी हो विषम
तब पिछला सब कुछ छोड़कर
तुम अपना नया आवास बुनो
बस अपने मन की आवाज सुनो
जब तडपे चंचल सी काया
जब राहे सब अनजानी हो
जब आँखों में बस पानी हो
जब साथ नो ये चाँद सितारे
जब मन अपना सब कुछ हारे
तब अपनी आँखों को मुन्दो
और अन्ध्यारे में भी प्रकाश चुनो
बस अपने मन की आवाज सुनो
जब का सुखे काजल
जब साथ न हो माँ का आंचल
जब सब हो जाये उथल पुथल
जब सांसो में न हो हल चल
जब सूनापन खाए जाये
जब दिल भी थोडा घबराये
तब बिन कुछ भी सोचे समझे
खुद का तुम विश्वास बनो
बस अपने दिल की आवाज सुनो
जब कुछ न तुम्हे दिखाई दे
कोई आहट भी न सुनाई दे
जब फूल से भी चुबते हो कांटे
जब कोई न सुख दुःख बाटे
जब कोई न थामे हाथ तुम्हारे
जब न हो तिनके का भी सहारा
उस पल खुद को दुनिया समझकर
अपना ही तुम हाथ चुनो
बस अपने मन की आवाज सुनो
जब राम नाम भी साथ न दे
जब कोई अपना हाथ न दे
जब ही घोपे खंजर
जब खुशिया हो जाये बंजर
जब सब कुछ हो जाये ख़त्म
जब परिस्थिया भी हो विषम
तब पिछला सब कुछ छोड़कर
तुम अपना नया आवास बुनो
बस अपने मन की आवाज सुनो
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