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तलाश इश्क की कर रहा इस जहान में हो गया में गुम कही खुद की पहचान में
Monday, 26 December 2011
zindagi na milegi dobara
जो मिला वही काफी था जीने के लिए
हस्ते हस्ते हर गम को पिने के लिए
एक जन्म कम था तेरा इंतजार के करने के लिए
तुझे तुझसे भी ज्यादा प्यार करने के लिए
तुम भी खुश रहो हम भी आबाद रहे
ज्यादा कुछ नहीं कही तुम्हे जहन में याद रहे
इतना मिलने पर बेसक ये दुनिया कहेती रहे मुझे आवारा
बस अपने आप में ही में खुश रह लू
तेरा दिया हर गम आंखे बंद करके सह लू
आंखे खुलने पर उनका आना भी जरुरी हे
वही तो हे जो करते हे अंदाजा के तुमसे कितनी दुरी हे
जिन्दगी भर बस तुमसे प्यार करता रहा
तुम्हारी खुशियों पर अपनी दुनिया वारता रहा
ना कोई मंजिल थी और ना कोई मकसद था हमारा
क्यों ना खुल के जी लू मिला हर
पल
ये सांसे बस यु ही करती रहे हलचल
हर मौसम का हस के ले लू मजा
उपहार की तरह ही सह लू हर सजा
यु ही धीरे धीरे चलती रहे जिंदगी
कभी कम न इन हवाओ किन सादगी
जी भर के देख कु इन हवाओ का नजारा
क्यों की ये जिंदगी ना मिलेगी
दोबारा
इन बदलो को यु मंडराते देख लू
इन बिजलियों को यु गुर्राते देख
लू
इन बारिश की बूंदों को यु ही चहेरे
पर ने दू
इन बूंदों को दिल तक उतर जाने
दू
इस बारिश के लिए धरती की चाहत
देख लू
धरती की प्यास भुजने से किसान
को राहत देख लू
देख लू इन मुस्कुराते चहेरो का
नजारा
इन लहलाते खेतो की हरियाली देख
लू
नाचे जब मोर तो वो चल मतवाली देख
लू
उस बगीचे में लगे फूलो को निहार
लू
हवा से हिलती इन जुल्फों को थोडा
सवार लू
बाग में लगे इन फलो को थोडा चख
लू
अछे हे पर थोडा सब्र भी रख लू
देख लू इन खुशनुमा पालो का नजारा
क्योकि ये जिंदगी ना मिलेगी दोबारा
नहीं मिली जो बरगद की छाव वो में
ले लू आज
देख इन खेत खलियानों को कर लू
गाव पर नाज
शहर छोड़ देने इरादा कर लिया
अब तो बस यही रह जाने का वादा
कर लिया
सूरज की ये गर्मी चुभती हे मुझे
पर जाने क्यों फिर भी प्यारी लगती
हे मुझे
और मन करता हे सह लू इस तपती गर्मी
का नजारा
क्योंकी ये जिंदगी ना मिलेगी दोबारा
सपना में वो ई प्यारी सी रुत लेकर
आँखों में आंखे दल वो गयी कुछ
कहेकर
धीरे से कण में प्यार का इज़हार
किया उसने
मेरे डूबती नोका को पानी से उभर
दिया उसने
मरते दम तक उसका इंतजार करूँगा
में
अपनी जान से भी जयादा उसको प्यार
करूँगा में
बस वो मिल जाये मुझको दोबारा
क्योकि ये जिंदगी ना मिलेगी दोबारा
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