तलाश इश्क की कर रहा इस जहान में हो गया में गुम कही खुद की पहचान में
Monday, 26 December 2011
मेरा चर्चा मेरी गली की हर जुबान पर
वो कहेते हे के इसके इरादे बड़े उफान पर
डरते हे वो अपने परिंदों के हालातो को देखकर
कही आ ना जाये उनके पर भी उड़न पर
मेरा चर्चा मेरी गली की हर जुबान पर
वो मेरे यारो से खर खाए बेठे हे
हमे देख वो अपना दिल जलाये बेठे हे
बुराइया करते हे हमारी वो बेथ दुकान पर
मेरा चर्चा मेरी गली की हर जुबान पर
वो हमें बदनाम करते रहे , हम फिर भी हस्ते रहे
उनकी बातो को सुन कर भी हम अनसुना करते रहे
पर बाज ना वो फिर भी अपना गुमान पर
मेरा चर्चा मेरी गली की हर जुबान पर
कसम खाते हे कुछ ना कुछ कर के दिखायंगे
इनकी जुबानो पर हम लगाम कसकर दिखायंगे
मेहनत करेंगे तो जरुर पहुचेंगे हम मक़ाम पर
मेरा चर्चा मेरी गली की हर जुबान पर
Subscribe to:
Post Comments (Atom)

No comments:
Post a Comment