जिन्दा हु में कब्र में रहकर भी
ज़माने के लिए जीते जी मर गया था में
तुम कुछ ना कर सके पास होकर भी
जुदा रहकर भी सब कुछ कर गया था में
और तुमने सोचा ही था दूर जाने के बारे में
कांच के टुकडो की तरह बिखर गया था मेंअ
तुम्हारे ही लिए तो जिन्दा हु में अब तक
ज़माने के लिए जीते जी मर गया था में
में तुमसे जुदा रह ही नहीं सकता
ये सब सोच कर ही बहुत डर गया था में
मेरी हरकतों का अभी उन्हें बुरा भी ना लगा था
उनके कहने से पहले ही सुधर गया था में
डूब रहा था गुमनामी के सागर में
तेरी आवाज के आने से ही उभर गया था में
तू भी मुझसे रूठ जायगी तो क्या करूँगा जी कर
ज़माने के लिए जीते जी मर गया था में
काँटों से भरी थी रहगुजर मेरी
तेरे इश्क में उससे पैर गुजर गया था में
खुश था में जख्म खाकर भी तुझे देखकर
तेरे खुसी में छोटो से उभर गया था में
जिस पल उठी तेरी डोली दरवाजे से
एक आसुओ के सागर से भर गया था में
अब क्या करूँगा में कब्र में जिन्दा रहकर
ज़माने के लिए जीते जी मर गया था में

No comments:
Post a Comment