Monday, 26 December 2011


 

लाशे इतनी हे यहाँ के कब्रे  काम पड़ रहे हे

हमारे नेता हे के बस आंखे नुम कर रहे हे

लोगो की जान की कीमत कफ़न से भी सस्ती हे

यहाँ वही जिन्दा रह सकता हे जो कुछ बड़ी हस्ती हे

गरीबो को कभी बम्ब तो कभी आतंक के हवाले कर दिया जाता हे

मरने को मरते हे इन्सान पर इन सरकारों का क्या जाता  हे

बस इन नेताओ के जेबे जम कर भर रही हे \

लाशे इतनी हे यहाँ के कब्रे  काम पड़ रहे हे

 

कसब और दाऊद पर धन खर्च करते रहे

जिन्हें थी जरुरत वो भूखे मरते रहे

ना ही कोई चिंता ना ही कोई मलाल हे

बेशर्मी की हद पार कर हमसे फिर एक सवाल हे

के फिर किसको अपना खून पिलाना हे

किसी को भी दो वोट सबने हे तो खाना हे

कुछ करने के नाम पर बस बाते कर रही हे

 लाशे इतनी हे यहाँ के कब्रे  काम पड़ रहे हे

 घर से निकलने पर लगता हे जुंग के लिए जा रहे हे

शयद वापस भी ना आये इस डर को पिए जा रहे हे

मरने से नहीं डरते बस वक्त आने का इंतजार हे

किसी और की मर्जी से मरने का दर्द खाता हर बार हे

अपने जान जयादा अपनों की जान का डर लगता हे

मासूम हे वो नहीं कुछ गुन्हा उनका हो सकता हे

फिर क्यों उनकी भी  सांसे सबके संग पिस रही हे

 लाशे इतनी हे यहाँ के कब्रे  काम पड़ रहे हे

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