Wednesday, 21 December 2011

आखिर कल किसने देखा हे



उस कल के बारे में फ़िक्र आज का बारे में पता नहीं
जिन्दगी में इतना डर के जीना इसमें उसकी कोई खता नहीं
बहूत की कोशिस मेने पर मुझको ये कल मिल नहीं पाता हे
ये कल मेरे उठने से पहले ही एक दिन क्यों और टल जाता हे
इसका क्या हे भरोसा ये फिर कल आये या ना आये
इस चक्कर में आज हमसे दूर ना रह जाये
कोई नहीं इस जहा में जिसने इसके टालने को रोका हे
में सच कहेता हु मेरे दोस्त आखिर कल किसने देखा हे

कोई अपना नहीं इस जहा में सब ही यहाँ पराये
पतझड़ में भी जो हमे बचाए वही तो सच्चे साये हे
में उसको अपना मानकर जन्दगी भर प्यार करता रहा
अपने आज को दाव पर लगा उसका कल सुधारता रहा
में जिसकी खुशियों के लिए बहुत कुछ कर गुजरना चाहता था
जिसके आंशु पोछने के लिए में खुद को बदलना चाहता था
में जनता हु के उसने मेरी कब्र पर एक भी आंशु भी ना फेका हे
में सच कहता हु मेरे दोस्त आखिर कल किसने देखा हे

एक कल हस्ते गाते गुजर गया एक कल के आने का हे डर
आने वाल कल को सोचकर कभी हुआ हु खुश कभी आंखे गई हे भर
मेरी आज करी हर गलती की सजा उसमे हे
मेरे करी शरारतो का मजा उसमे हे
छुपी हे बहुत सी असी बाते जिनके लिए हे इंतजार इस कल का
क्योकि अलग अनुभव होता हे करने में इंतजार उस फल का
जिसके लिए अपने पूरा आज हमने उसमे झोका हे
में सच कहता हु मेरे दोस्त आखिर कल किसने देखा हे

कल मुझे कुछ एसा करना हे जिसका मुझे इंतजार हे
उससे भी कल करना अपने प्यार का इजहार हे
बचपने को भुला कल मुझे सपनो को साकार करना हे
बीच में आयी हे ये रात बस इसको पर करना हे
में जनता हु के मेरे बताने पर वो बहुत खुश होंगे
साथ ही मुझे देह्रो आशीर्वाद भी देंगे
मुझे कुछ कम करने से उन्होंने अब तक ना टोका हे
में सच कहता हु मेरे दोस्त आखिर कल किसने देखा हे

मेरी नजर में अच्छा हे कल किसी को दिख नहीं पता हे
आने वाली खुसी तो झेल ले पैर गम नहीं झेल पता हे
मौत का पैगाम लिए यमराज को कल आना था अगर वो आज आयेगा
चित्रगुप्त के खातो पर भी इसका बहुत गहेरा असर पद जायेगा
उसके पास किसी के जीवन मरण का लेखा जोखा नहीं रहेगा
तो ये उनके योगदान पर टिका संसार केसे चलेगा
यही तो हे जो जीवन उर मरण के बिच के रेखा हे
में सच कहता हु मेरे दोस्त आखिर कल किसने देखा हे

No comments: