Tuesday, 10 January 2012

सरफिरा हु में


नहीं कर पता था में किसी का इन्तजार
शयद इसी लिए नहीं करता था कोई मुझसे प्यार
अटका रहता था में अपनी जुबान पर
खून हुआ करता था हर पल उफान पर
पर तेरे इश्क में कुछ तो सुधरा हु में
वरना जमाना जनता हे सरफिरा हु में

नहीं की थी अब तक इतनी इज्जत से बात मेने
और जूते की नोक पर रखे जज्बात मेने
और अब उनमे ही बहता जा रहा हु
तुझको हे खुदा कहता  जा रहा हु
तेरे इश्क में काटो भरी डगर से गुजरा  हु में
वरना जमाना जनता हे सरफिरा हु में

दिल नहीं पत्थर था मेरे सीने में
सच कहू कोई मजा भी नहीं था जीने में
तुने पत्थर को मोम के तरह पिघला दिया
मेरे सारा गुरुर मिटटी में मिला दिया
इसी लिए तेरे चहेरे के आगे तो बिखरा हु में
वरना जमाना जनता हे सरफिरा हु में

कहा चली गयी वो बनावटी मुस्कान मेरी
मुझे सबसे जुदा करने वाली पहचान मेरी
जाने क्यों तोह्दी तहजीब आ रही हे
शयद तू मेरे थोडा करीब आ रहे हे
तभी तो कालिक लगाकर भी निखर हु में
वरना जमाना जनता हे सरफिरा हु में


और यारो का साथ एहना भी छुट गया
तू क्या रूठी मुझसे जमाना भी रूठ गया
कहा में नहीं डरा करता था मरने से
और अब दर लगता हे सामना करने से
तेरे चक्कर में हे तो सीसे में उतरा हु में
वरना जमाना जनता हे सरफिरा हु में


हर जगह था मेरे कारनामो का चर्चा
हर थाने में था मेरे सूरत का परचा
देख मेरे कीमत कितना इनाम हे मुझपर
कोई डरता हे तो गर्व होता हे खुद पर
तेरे लिए हे तो ये सब छोड़ सुधरा हु में
वरना जमाना जनता हे सरफिरा हु में

वेसे तुने अंदर के इंसान को जगाया हे
तुने मेरे आत्मा को भी अहसास कराया हे
क्योकी बचपन में सरफिरा नहीं था
बड़ा संत और अक्दुम सही था
सच में बहुत मजबूरियों से गुजरा हु में
वरना जमाना जनता हे सरफिरा हु में


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