Saturday, 14 January 2012

हसे अगर जमाना तुमपर तो रो कर मत दिखाना


हसे अगर जमाना तुमपर तो रो कर मत दिखाना

जवाब देना उन्हें और उनसे तुम नजरे मिलाना

बता देना उन्हें के तुम नहीं डरते हो उनसे

चाहे जो कर लो आगे नहीं हो सकते हमसे

बस उस मंजिल को आंखे में भर लेना

पाने से पहले मंजिल एक दुआ कर लेना

चाहे लाख हो दीवारे तुमको  फतह को हे पाना

हसे अगर जमाना तुमपर तो रो कर मत दिखाना

ये तो चाल चलता हे तुम्हे आजमाने की

तुम्हे तुम्हारी मंजिल से भटकाने की

कभी कभी तो ये तुमपर छुपकर वार करता हे

नजाने क्यों ये सामना आने से भी डरता हे

डरना पर भी इसका काम हे तुम्हे केवल नीचा दिखाना

हसे अगर जमाना तुमपर तो रो कर मत दिखाना

तुम्हारी राहों में ये कांटे इतने बिछाएगी

तुमपर तुम्हारी रूह भी सवाल उठायेगी

जख्मी जब होंगे तुम्हारे कदम

श्याद तब तो आयेगी उन्हें थोड़ी शर्म

उनकी आँखों के उन अन्शुओ को भी हत्यार बनाना

 हसे अगर जमाना तुमपर तो रो कर मत दिखाना

अगर तुम अपने जज्बातों पर काबू पा लोगे

एक खुश और बेहतर जिन्दगी का सपना सजा लोगे

नहीं सोचोगे कभी वापस जाने  के बारे में

तो याद करेंगे लोग तुम्हे सबुह के उज्यारे में

तुम अपनी बुलंदियों की ऊँचाई पर बेठे होगे

तब तुम भी ज़माने के बारे में कुछ कहते होगे

कहते तो सब हे के हे एक दिन सबको जाना

हसे अगर जमाना तुमपर तो रो कर मत दिखाना





 


 


 

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