जमाना ख़राब हे कुछ तो शर्म करो
खाली बेठे रहते हो कुछ तो शर्म करो
ये कुछ न करने पर चार बता बना देगा
तुम्हे छोड़ ये कम्बक्त तो हमे भी रुला लेगा
इसके लिए लांछन लगाना कुछ मुस्किल नहीं
मालूम हे हमे के हमपर उंगली उठाने के काबिल नहीं
ये जलता हे हम दोनों की खुसी को देखकर
आग लग जाती हे तनबदन हमारी हँसी को देखक्र
इसी लिए अब तुम हमसे मिलना कुछ कम करो
जमाना ख़राब हे कुछ तो शर्म करो
इस ज़माने ने हमे जुदा करने के किये कई जतन
नहीं जानते ये हम जुदा नहीं होंगे बिना कफ़न
जी नहीं सकते साथ तो साथ मर ही जायंगे
बड़ी बड़ी प्रेम कहानियों में अपना नाम लिख्वायंगे
जीता हर आशिक तो बस उनसे मिलने की फ़रियाद करता हे
नहीं पूछता कोई जिन्दा हुने पर मरने पर जमाना याद करता हे
इन आशिको को का बलिदान अब तो ख़त्म करो
जमाना ख़राब हे कुछ तो शर्म करो
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