जवान बेटे
के शव को
देखकर उनको सदमा
तो पहुचेगा
उनका मन
भीतर भीतर उनकी
ममता को नोचेगा
मुझसे न देखा
जाएगा उस माँ
की एसी पीढ़ा
को
उस पल
घिन भगवान होगी
तुझपर तेरी क्रीडा
को
उस पल
उस माँ ने
मुझसे कहा के
मेरा लाल दे
दो लाकर
तू ही
बता दे दोस्त
मेरे में क्या
कहू उनसे जाकर
मेरी झुकी
नजरो में जब
वो अंशु वारसा
को देखेगी
खुद भला
अपने माथे का
सिन्दूर वो पोछेगी
उसको भी
विस्वास ना होगा
मेरी जुबा के
बानो का
केसे देगी
अबला जवाब इस
जहा के तानो
का
उस पल
उसने कह जो
दिया मेरा स्व्हाग
दे दो लाकर
तू ही
बता दे दोस्त
मेरे में क्या
कहू उनसे जाकर
जिस बाप की इकलोती लाठी टूटी उस पर क्या गुजरेगी
उसके कानो केसे मुझसे बात भला ये उतरेगी
उसको कंदा देने वाला खुद कंधे का मोहताज हुआ
फिर भी उस पिता उस खून के सहीद होने पर नाज हुआ
पर उस उसने कह जो दीदा कोन देगा मुझे कन्धा आकार
तू ही
बता दे दोस्त
मेरे में क्या
कहू उनसे जाकर
जब मेरी आँखों के सामने हो तेरा वो तारा
जो इस जहा में था तुझको सबसे प्यारा
उस पल उसकी वो किलकारी में ना सुन पाउँगा
हो सकता हे जीते जी उस पल में मर जाऊंगा
उसने मुझसे कह जो दिया मेरा बाप दे दो लाकर
तू ही
बता दे दोस्त
मेरे में क्या
कहू उनसे जाकर
जब तेरी वो नन्ही परी आँखों में आंशु भर लेगी
तब तेरी माँ आकर उसकी पलकों को पोछेगी
उसकी मासुमियत का केसे में दूंगा जवाब
उस पल जाने टूटेंगे उसके कितने ख्वाब
उस पल कह जो दिया दे दो मेरा बाबुल लाकर
तू ही
बता दे दोस्त
मेरे में क्या
कहू उनसे जाकर
तुने की मुझसे भी की हे एक बहुत बड़ी गद्दारी
अपनी जान छुड़ा इस युग से दे दी मुझको जिम्मेदारी
मुझको पता हे में सामना उनका ना में कर पाउँगा
ना ही अपने सब्र के बांध को यु में रोक पाउँगा
खुद हे तू जा रहा मुझको इतने प्रश्नों में उलझाकर
तू ही
बता दे दोस्त
मेरे में क्या
कहू उनसे जाकर
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