Tuesday, 31 January 2012

तू ही बता दे दोस्त मेरे में क्या कहू उनसे जाकर

जवान बेटे के शव को देखकर उनको सदमा तो पहुचेगा
उनका मन भीतर भीतर उनकी ममता को नोचेगा
मुझसे देखा जाएगा उस माँ की एसी पीढ़ा को
उस पल घिन भगवान होगी तुझपर तेरी क्रीडा को
उस पल उस माँ ने मुझसे कहा के मेरा लाल दे दो लाकर
तू ही बता दे दोस्त मेरे में क्या कहू उनसे जाकर

मेरी झुकी नजरो में जब वो अंशु वारसा को देखेगी
खुद भला अपने माथे का सिन्दूर वो पोछेगी
उसको भी विस्वास ना होगा मेरी जुबा के बानो का
केसे देगी अबला जवाब इस जहा के तानो का
उस पल उसने कह जो दिया मेरा स्व्हाग दे दो लाकर
तू ही बता दे दोस्त मेरे में क्या कहू उनसे जाकर

जिस बाप की इकलोती लाठी टूटी उस पर क्या गुजरेगी
उसके कानो केसे मुझसे बात भला ये उतरेगी
उसको कंदा देने वाला खुद कंधे का मोहताज हुआ
फिर भी उस पिता उस खून के सहीद होने पर नाज हुआ
पर उस उसने कह जो दीदा कोन देगा मुझे कन्धा आकार
तू ही बता दे दोस्त मेरे में क्या कहू उनसे जाकर

जब मेरी आँखों के सामने हो तेरा वो तारा
जो इस जहा में था तुझको सबसे प्यारा
उस पल उसकी वो किलकारी में ना सुन पाउँगा
हो सकता हे जीते जी उस पल में मर जाऊंगा
उसने मुझसे कह जो दिया मेरा बाप दे दो लाकर
तू ही बता दे दोस्त मेरे में क्या कहू उनसे जाकर

जब तेरी वो नन्ही परी आँखों में आंशु भर लेगी
तब तेरी माँ आकर उसकी पलकों को पोछेगी
उसकी मासुमियत का केसे में दूंगा जवाब
उस पल जाने टूटेंगे उसके कितने ख्वाब
उस पल कह जो दिया दे दो मेरा बाबुल लाकर
तू ही बता दे दोस्त मेरे में क्या कहू उनसे जाकर

तुने की मुझसे भी की हे एक बहुत बड़ी गद्दारी
अपनी जान छुड़ा इस युग से दे दी मुझको जिम्मेदारी
मुझको पता हे में सामना उनका ना में कर पाउँगा
ना ही अपने सब्र के बांध को यु में रोक पाउँगा
खुद हे तू जा रहा मुझको इतने प्रश्नों में उलझाकर
तू ही बता दे दोस्त मेरे में क्या कहू उनसे जाकर

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