Sunday, 15 January 2012

जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी


जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी

जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी

छुपा छुपा कर रोता था में अपने नेनो को

कही दिख ना जाये अंशु मेरी बहनों को

आंशु तो पी लिए पर जज्बात रुक ना पाए

मेने तो की थी पुरी कोशिश पर हालत रुक ना पाए

लगता हे कोशिस कुछ कम थी मेरी

जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी

जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी

भगा दोडा फिरता था में तुम्हे बचाने को

खुदा नहीं वक्त सही मुझे अजमाने को

छोटा था में उन सब जिम्मेदारियों के लिए

लड़ना सखा खुद से भी खुद्दरियो के लिए

हसना में भुला नहीं पर रोना भी आता था

अपनी खुशियों का पता गम में भी दुंड लाता था

उन सब जिम्मेदारियों के लिए अभी उम्र कम थी मेरी

जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी

जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी


उस रोज में पहली बार तुम्हे छोड़ने आया

नहीं इल्म इस बात का आखरी बार हे मिलाया

बाद जाना में के उस वक्त कु मुझे इतना समझाया था

मुझको अपनी जिन्दगी में कुछ करने को उकसाया था

जो कुछ पल मुझे जिन्दगी भर याद रहेंगे

उन लम्हों को याद कर हम हर गम को सहेंगे

उस वक्त शयद गम सहने की शक्ती कम थी मेरी

जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी

जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी



जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी

जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी

क्या हमे अकेला छोड़ खुश हो तुम

तलसा तुम्हे अस्मा में वह भी नहीं हो तुम

कुछ तो बताओ अपने बारे में हमे

ताकी भूल सके हम वो सरे लम्हे

उस हर लम्हे की याद अब भी हमे आती हे

पर आने वो हमको बड़ा रुलाती हे

जिन्दगी में बीती जो सुखद घडिय वो कम थी मेरी

जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी

जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी

No comments: