जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी
छुपा छुपा कर रोता था में अपने नेनो को
कही दिख ना जाये अंशु मेरी बहनों को
आंशु तो पी लिए पर जज्बात रुक ना पाए
मेने तो की थी पुरी कोशिश पर हालत रुक ना पाए
लगता हे कोशिस कुछ कम थी मेरी
जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी
जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी
भगा दोडा फिरता था में तुम्हे बचाने को
खुदा नहीं वक्त सही मुझे अजमाने को
छोटा था में उन सब जिम्मेदारियों के लिए
लड़ना सखा खुद से भी खुद्दरियो के लिए
हसना में भुला नहीं पर रोना भी आता था
अपनी खुशियों का पता गम में भी दुंड लाता था
उन सब जिम्मेदारियों के लिए अभी उम्र कम थी मेरी
जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी
जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी
उस रोज में पहली बार तुम्हे छोड़ने आया
नहीं इल्म इस बात का आखरी बार हे मिलाया
बाद जाना में के उस वक्त कु मुझे इतना समझाया था
मुझको अपनी जिन्दगी में कुछ करने को उकसाया था
जो कुछ पल मुझे जिन्दगी भर याद रहेंगे
उन लम्हों को याद कर हम हर गम को सहेंगे
उस वक्त शयद गम सहने की शक्ती कम थी मेरी
जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी
जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी
जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी
जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी
क्या हमे अकेला छोड़ खुश हो तुम
तलसा तुम्हे अस्मा में वह भी नहीं हो तुम
कुछ तो बताओ अपने बारे में हमे
ताकी भूल सके हम वो सरे लम्हे
उस हर लम्हे की याद अब भी हमे आती हे
पर आने वो हमको बड़ा रुलाती हे
जिन्दगी में बीती जो सुखद घडिय वो कम थी मेरी
जब छुठा हटो से हट तो आंखे नम थी मेरी
जब करनी कुछ बात तो बाते कम थी मेरी
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