तेरा बेरंग सा चेहरा
टुटा आँखों का पहरा
छपाए छुपता नहीं जब
दिल में हो दर्द जो गहेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ...
तेरे हे होट भी गुमसुम
हमे क्या कुछ नहीं मालूम
उठा हे किस घर जनाजा
उठा हे किस घर जनाजा
बंधा हे किस घर सेहरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
तेरी आँखों का पानी
बया करता हे कहानी
बस खुदा हफिस ना कहना
वरना छा जाये घनघोर अँधेरा
वरना छा जाये घनघोर अँधेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
जो भी हे तुम्हारे दिल
कहो भरी महफ़िल में
मुख्तसर(छोटा) जीवन मेरा
चाँद लहरों पर ठेहेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
जब मेरी आँखों से भी छलका
नमक का पानी वो हल्का
जहा में बाड़ थी आयी
नभ का रंग सुन्हेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
जब से तुम यु हो रूठी
हमारी हर खुसी हे झूठी
नजाने कब थी दिवाली
नजाने कब हे द्श्हेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
अब तुम मन भी जाओ
हमे यु ना तुम रुलाओ
जब ओगी वापस
होगा तब ही अब सवेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
जब मेरी आँखों से भी छलका
नमक का पानी वो हल्का
जहा में बाड़ थी आयी
नभ का रंग सुन्हेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
जब से तुम यु हो रूठी
हमारी हर खुसी हे झूठी
नजाने कब थी दिवाली
नजाने कब हे द्श्हेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......
अब तुम मन भी जाओ
हमे यु ना तुम रुलाओ
जब ओगी वापस
होगा तब ही अब सवेरा
तेरा बेरंग सा चेहरा ......

1 comment:
पवन ---ब्लॉग पर केवल एक कविता देख आश्चर्य हुआ. लिखते रहो. लिखते लिखते कलम कसेगी.दूसरी बात-आप ने प्रकाशित की हुई कविता में वर्तनी की गंभीर क्षतियों है. कृपा उसे ठीक करे.
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