Friday, 1 June 2012

रास्ते WAY




I  SAID
नजाने कहाँ से आते ये रास्ते
नजाने कहाँ को जाते हे ये रास्ते
कोई पहुंच जाये इनकी हद तक तो
फिर घूम जाते हे ये रास्ते


SHE SAID
ना कही से आते हे ये रास्ते
ना कही को जाते हे ये रास्ते
आना जाना तो मुस्फिरो का काम
बस उन्हें राह दिखाते हे ये रास्ते


I SAID
कितना भी चल कभी ना पाओगे मंजिल 
पेरो में होंगे चले और दुखेगा तुम्हारा दिल
और राह तो लोगो न चाँद तक बना ली
चांदनी को आखिर कोन कर पाया हासिल

SHE SAID
मन हो विस्वास तो हर मंजिल मिल जाती हे
कोसिस करो तो हर महफ़िल हिल जाती हे
क्यों जाते हो चाँद पर इतना सफ़र तय करके
चांदनी तो धरती पर भी खिल जाती हे
THEN SHE WON
AND I SAID
रहा वही हे ये कहा जाने वाली हे
इसकी तो दोनों तरफे ही खली हे
मुस्फिरोको रहा के साथ ही चलना पड़ता हे
क्योकि एक हाथ से बजती कहा ताली हे  

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