कम हे इक सावन भी मेरा दर्द दिखाने के लिएबस याद ही काफी हे तेरी तुझको भुलाने के लिए
क्यों बताते हो हाले- ऐ- दिल उस पगली का तुम मुझे
वो तिरछी निगाहे ही काफी हे मेरा दिल जलाने के लिए
सांस् भी भरता हु तो एक बोझ सा लगता मुझे
तू ही बता में क्या करू कर्ज तेरा चुकाने के लिए
हर कोई देखता हे रहम की नजरो से अब
काला चस्मा भी लगाया सब कुछ छुपाने के लिए
कम हे इक सावन भी मेरा दर्द दिखाने के लिए
बस याद ही काफी हे तेरी तुझको भुलाने के लिए
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