तलाश इश्क की कर रहा इस जहान में
हो गया में गुम कही खुद की पहचान में
Saturday, 18 January 2014
देखो सोये हम नहीं
तुमने भरी भीड़ में हाथ छोड़ा पर खोये हम नहीं तन्हा थे घबराना लाजमी था पर रोये हम नहीं तुमने यही सोचा होगा खवाबो में आकार सतोगी मुझे कफ़न में लिपटी रही लाश मेरी पर देखो सोये हम नहीं
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