1.
बहुत हुआ ये दर्द-ऐ-इश्क
बहुत हुआ आँखों का बादल काला
मत टपका पलको से मदिरा
मत खाली कर दिल का प्याला
इस दुनिया के नून मिर्च से
अपने अपने घाव बचाकर
दुःख की की पीड़ा को पिने
चल दोनों चलते हैं मधुशाला
2.
बिन पिए ही कदम डगमगाते
ये केसा तूने मन में डर पाला
हाथ थाम ले मेरा कसकर और
जपता चल नीलकंठ की माला
भूला देगा तू खुद ही दुनिया
बस प्याले से अपने होट लगाकर
चोखट पर माथा टेक ले भईया
स्वागत हैं करती हैं तेरा मधुशाला
3.
रिश्ते नाते सब हैं झूठे
झूठा हैं जीवन देने वाला
क्यों हाड़ मॉस में भेदभाव
जब सबको उसने ही पाला
एक मदिरा ही ऐसी हैं
जो भेद भाव से दूर हैं
सबको एक तराजू में
तोले रही हैं मधुशाला
4.
सुना है कुछ प्यालो से ही
खुल जाता है दिल का ताला
फिर अपने सारे काले करतब
जुबान पर रखता पीने वाला
कभी होटो से हँसी है गिरती
कभी आँखों से गिरते आँशु
तुमको भी खुलना हो ऐसे
तो आ जाना तुम मधुशाला
5.
राम नाम जपते हो या फिर
मन अन्दर से है काला
पीकर बाहर सब आ जाता है
जो भी हो दिल में पाला
डरता हु ना खो बैठु तुमको
दिल के सारे राज बताकर
एक रोज दिल पर पत्थर रख
में भी आ जाऊंगा मधुशाला।।
6.
सूरज चला गया घर को
तब साकी लेने आया हाला l
उसी क़तर में खड़ा था बाबु,
उसी में खड़ा रिक्शे वाला l
धन दोलत का जोर ना चलता
ना चलती है गुन्डा -गर्दी
तो क्यों ना सारा का सारा जग
ही बन जाये फिर मधुशाला ......
7.
दिल के टुकड़े-टुकड़े हो या
निकले उसपर कोई छाला l
आस्तीन के सांपो से
जब पड़ जायेगा पाला l
जब दरिया भी अश्को
अपनाने से इंकार करेगा
तब भी बाहें फेला कर खड़ी
रहेगी हर मुश्किल में मधुशाला
8.
जब छुएगा कोई तुझको
और डालेगा जब वरमाला
जाने क्या -2 भस्म करेगी
इस टूटे से दिल की ज्वाला
ना कोई साथी न कोई सहारा
कोई ना तुझको शांत करेगा
शांत करेगी तेरी जलन को
तू आ जाना बस मधुशाला
9.
राम नाम ना हो जुबां पर
ना ही हो अलाह -ताला
मेरे शव पर पड़ी रहे
बस बलखाती अंगूरी माला
कन्धा देने वालो बस
इतना ही तुम याद रखो
उस रस्ते ले जाना मुजको
जहाँ पड़ेगी मधुशाला
10.
सच भी होता है कडवा
और कडवी होती है हाला...
कितना भी जुठ मिला लो
मीठा ना होता है प्याला ...
सच की कसमो की खातिर
ना गीता पर तुम हाथ रखो
या मदिरा पर हाथ रखो
या चले आओ फिर मधुशाला
11.
घाट घाट घुमा में लेकर
प्यासे मन का खाली प्याला
विचलित मन शांत करे जो
मिली नहीं पर वो हाला
जब तन -मन- धन सब
ही थक- थक कर चूर हुए
तब जाकर जाना हमने
वही मोक्ष है ,वही मधुशाला
..
12 .
बड़े बड़े ग्रंथो से बांचा
बहुत बड़ा अक्षर काला
हरी नाम भजने को डाली
तुलसी चंदन की माला
साँझ भई भुला काले अक्षर
भूल गया तुलसी चन्दन
उतार जनेऊ पंडित भी
भी देखो आया मेरी मधुशाला ..
13.
आँखों में अश्क नहीं है ,
नही है हाथो में हाला
जाने कब से छुआ नहीं
होटो ने जादुई प्याला
रूठे रूठे से मुझको
अपने सारे दर्द लगे है
रूठे जग बेशक मुझसे
पर रूठ ना जाये मधुशाला
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