सुनो ना
,
तेरे अक्श
में , मै कही गुम
हो गया हु
मैं , मै नहीं
हु अब , तुम
हो गया हु
बदली है
आदते मेरी, बदला
है मिजाज मेरा
पहले से
बहुत बेहतर हुआ
है आज मेरा
अब मै पहले
की तरह मायूस
नहीं
पर किसी
से कहना मत , ये
है राज मेरा
किसी बड़े
शायर की नज्म हो गया
हु मै
मैं , मै नहीं
हु अब , तुम
हो गया हु
तुमसे सीखा
है मेने खुद
को समझाना
खुद से
रूठो को, बार बार मनाना
रिस्तो को
बचाने के
लिए
खुद को
खुद से निचे गिराना
खुद को
गिराकर थोड़ा कम हो गया
हु मै
मैं , मै नहीं
हु अब , तुम
हो गया हु
तुमसे सीखा
है मेने जीने
का सलीका
खुद पर
काबू करने का खुदरंग तरीका
झरना होकर भी नदी की तरह शांत रहना
सारे पर्वतो से लड़कर भी आराम से बहना
तुम्हारी सीखो से बहुत नरम
हो गया हु मै
मैं , मै नहीं
हु अब , तुम
हो गया हु
No comments:
Post a Comment